घरेलू रसोई से लेकर वैश्विक भू-राजनीति तक का असर
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने 7 मार्च 2026 से घरेलू गैस सिलेंडर(LPG) की कीमतों में 60 रुपए की बढ़ोतरी की है, जिससे दिल्ली में इसकी नई दर 913 रुपए हो गई है। वहीं, व्यावसायिक(Commercial) सिलेंडर के दाम 115 रुपए बढ़ाकर 1883 रुपए कर दिए गए हैं। यह बढ़ोतरी करीब एक साल के अंतराल के बाद हुई है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर पड़ेगा।
ईरान-इजराइल तनाव और सप्लाई चेन का संकट
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण एलपीजी आपूर्ति पर गहरा संकट मंडरा रहा है। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के असुरक्षित(Vulnerable) होने और कतर के एलएनजी(LPG) प्लांट पर ड्रोन हमलों के कारण भारत के आयात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। भारत अपनी एलएनजी जरूरतों का 40% हिस्सा कतर से पूरा करता है, जिसके ठप होने से घरेलू स्तर पर गैस की कमी की आशंका बढ़ गई है।
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आपातकालीन उपाय और सरकारी आदेश
संकट से निपटने के लिए सरकार ने ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ के तहत सभी रिफाइनरियों को प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग केवल रसोई गैस उत्पादन के लिए करने का निर्देश दिया है। यद्यपि इससे पेट्रोकेमिकल कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ेगा, लेकिन सरकार का लक्ष्य उपभोक्ताओं को बिना किसी बाधा के सिलेंडर उपलब्ध कराना है। साथ ही, रूस से तेल आयात बढ़ाकर होर्मुज रूट पर निर्भरता को कम करने का प्रयास भी जारी है।
सरकार ने रसोई गैस का उत्पादन बढ़ाने के लिए कौन सा कानूनी अधिकार इस्तेमाल किया है?
सरकार ने एलपीजी(LPG) उत्पादन बढ़ाने के लिए ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ यानी ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ (ESMA) के तहत मिली आपातकालीन शक्तियों का उपयोग किया है।
भारत के गैस आयात के लिए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ क्यों महत्वपूर्ण है?
यह 167 किमी लंबा जलमार्ग फारस(LPG) की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से आयात करता है, इसलिए इसका बंद होना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है।
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