Vijay Raji: विजय राजी ने बेची अपनी कंपनी

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Vijay Raji
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ओपनएआई को 1.1 अरब डॉलर में डील

नई दिल्ली: भारतीय मूल के उद्यमी विजय राजी(Vijay Raji) ने अपनी स्टार्टअप कंपनी स्टैट्सिग(Statsig) को ओपनएआई(OpenAI) को बेच दिया है। यह सौदा 1.1 अरब डॉलर यानी लगभग 10 हजार करोड़ रुपये में हुआ, जिसमें भुगतान पूरी तरह शेयरों के रूप में किया गया। इस डील के बाद विजय ओपनएआई में एप्लीकेशन डिवीजन के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी बन गए हैं

डील के बाद ओपनएआई में नई भूमिका

ओपनएआई ने कहा है कि विजय राजी(Vijay Raji) अपने साथ मेटा में बड़े पैमाने पर कंज्यूमर इंजीनियरिंग का 10 साल का अनुभव लेकर आए हैं। इससे पहले वे माइक्रोसॉफ्ट और मेटा में लगभग दो दशक काम कर चुके हैं। एक उद्यमी के रूप में उनकी सोच और तकनीकी क्षमता ओपनएआई को और मजबूत बनाएगी।

सीटीओ के रूप में विजय, एप्लीकेशन डिवीजन की सीईओ फिजी सिमो को रिपोर्ट करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि वे इस नई जिम्मेदारी को लेकर बेहद उत्साहित हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि स्टैट्सिग के कर्मचारी अब ओपनएआई का हिस्सा होंगे, लेकिन कंपनी पहले की तरह स्वतंत्र रूप से ग्राहकों को सेवाएं देती रहेगी।

विजय राजी का करियर सफर

विजय राजी(Vijay Raji) का जन्म भारत में हुआ और वे इस समय सिएटल में रहते हैं। उन्होंने 1999 में पुडुचेरी यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे माइक्रोसॉफ्ट में शामिल हुए, जहां लगभग 10 साल तक काम करते हुए उन्होंने Windows एप्लीकेशन फ्रेमवर्क और SQL सर्वर मॉडलिंग जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में योगदान दिया।

साल 2011 में वे फेसबुक में शामिल हुए और सॉफ्टवेयर इंजीनियर से लेकर VP और हेड ऑफ एंटरटेनमेंट तक का सफर तय किया। चार साल पहले उन्होंने स्टैट्सिग की शुरुआत की, जो प्रोडक्ट टेस्टिंग में विशेषज्ञ है और तेजी से सफल हुई।

मेटा को दूसरा बड़ा झटका

हाल के दिनों में मेटा को लगातार अपने कर्मचारियों के ओपनएआई की ओर जाने से नुकसान हो रहा है। कुछ समय पहले ही कंपनी की एआई लीडर छाया नायक ने भी ओपनएआई जॉइन कर लिया था। अब विजय राजी जैसे अनुभवी उद्यमी के जुड़ने से ओपनएआई की स्थिति और मजबूत होगी। हालांकि विजय सीधे तौर पर मेटा से अब जुड़े नहीं थे, लेकिन वहां बिताया गया लंबा समय इस खबर को और अहम बनाता है।

विजय राजी ने अपनी कंपनी बेचने का फैसला क्यों लिया?

उन्होंने यह कदम अपनी स्टार्टअप की क्षमता को और बड़े प्लेटफॉर्म पर ले जाने और ओपनएआई जैसी ग्लोबल टेक कंपनी के साथ जुड़कर नए अवसर तलाशने के लिए उठाया।

मेटा को ओपनएआई से बार-बार झटका क्यों लग रहा है?

कंपनी के कई अनुभवी कर्मचारी बेहतर अवसर और रिसर्च सुविधाओं के कारण ओपनएआई की ओर रुख कर रहे हैं। इससे मेटा को अपनी एआई रणनीति को फिर से मजबूत करने की चुनौती मिल रही है।

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Dhanarekha

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