ज्योतिषी से जानें गुप्त समय
हिंदू धर्म में एक समय ऐसा माना गया है कि उस समय स्वयं माता सरस्वती जुबान पर बैठती हैं. इस समय हम जो कुछ भी बोलते हैं, वह सच हो जाता है इसलिए घर के बड़े बुजुर्ग हमेशा कहते हैं कि हमेशा शुभ बोलना चाहिए और शुभ ही कहना चाहिए. पता नहीं कब जीब पर सरस्वती माता बैठ जाएं और आपके द्वारा उस समय कही गई कैसी भी बात सच हो जाए. आइए जानते हैं जीब पर कब बैठती हैं माता सरस्वती…
- माता सरस्वती ब्रह्म मुहूर्त में जुबान पर बैठती हैं।
- ब्रह्म मुहूर्त सुबह 3:20 से 3:40 के बीच होता है।
- इस समय कही गई बातें सच हो जाती हैं।
आपने घर के बड़े बुजुर्गों से यह कहते तो सुना होगा कि गलत नहीं बोलना चाहिए, पता नहीं कब जीब पर सरस्वती बैठ जाए और बात सही हो जाए इसलिए हमेशा अच्छा अच्छा बोलो और अच्छा अच्छा कहो. जुबान पर सरस्वती का मतलब है कि आपने उस समय जो कुछ भी बोला और वह बात सच हो जाती है. धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि 24 घंटों में से 20 मिनट ऐसे होते हैं, जब जुबान पर सरस्वती बैठती है और वह बात सच हो जाती है. इसलिए कहा जाता है सही सही बोलना चाहिए और सही सही सोचना चाहिए. माता सरस्वती ज्ञान, बुद्धि और विद्या की देवी हैं, इन्हीं माता की कृपा से निर्धन के यहां जन्म लेने वाला व्यक्ति राजा बन जाता है और हर जगह पूजा जाता है. आइए जानते हैं माता सरस्वती जुबान पर कब बैठती हैं…
काली जुबान का क्या है मतलब
धर्म शास्त्रों के अनुसार, 24 घंटों में से केवल 20 मिनट ऐसे होते हैं, जब जीब पर स्वयं माता सरस्वती विराजमान होती हैं. उस समय आपके द्वार कही गई कोई भी बात सच हो सकती है. वहीं आपने सुना होगा कि इस इंसान की तो जुबान ही काली है क्योंकि ऐसे व्यक्ति की ज्यादातर बातें सच हो जाती हैं. काली जुबान को अक्सर नकारात्मक संदर्भ में कहा जाता है, जैसे कि अगर व्यक्ति किसी के बारे में बुरा कहता है और बाद में वह सच भी हो जाता है. दरअसल उस समय जीभ पर सरस्वती बैठ जाती है और बातें सच हो जाती हैं।
इस तरह की इच्छा ना रखें
धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि ब्रह्म मुहूर्त के समय माता सरस्वती जुबान पर वास यानी बैठती हैं. ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले का समय होता है, इसी मुहूर्त में पूजा पाठ आदि धार्मिक कार्यक्रम किए जाते हैं. मान्यता है कि ब्रह्म मुहूर्त में उठकर माता सरस्वती का ध्यान करके अपनी मनोकामना कहने से जल्द इच्छा पूरी हो जाती है. लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ऐसी कोई इच्छा ना रखें, जिससे किसी का अहित हो।