Tarapur :हरित क्षेत्र नीति से उद्योग प्रभावित, गुजरात जा रहे प्लांट।

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हरित क्षेत्र अनिवार्यता के कारण रासायनिक कारखाने Tarapur को छोड़कर गुजरात जा रहे हैं

महाराष्ट्र के Tarapur औद्योगिक क्षेत्र में चल रहे रासायनिक कारखाने अब एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहे हैं। दरअसल,

राज्य सरकार द्वारा हरित क्षेत्र (ग्रीन ज़ोन) की अनिवार्यता को लेकर जो नए नियम लागू किए गए हैं, वे अब इन उद्योगों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं।

यही वजह है कि कई प्रमुख रासायनिक प्लांट अब तारापुर से अपना काम समेटकर गुजरात का रुख कर रहे हैं

क्या है हरित क्षेत्र की अनिवार्यता?

  • पर्यावरण संरक्षण: सरकार का उद्देश्य पर्यावरण को संरक्षित करना और प्रदूषण को नियंत्रित करना है।
    • इसी कारण से रिहायशी क्षेत्रों के पास प्रदूषणकारी उद्योगों को अनुमति नहीं दी जा रही।
  • ग्रीन ज़ोन डिक्लेरेशन: Tarapur को ग्रीन ज़ोन घोषित किए जाने के बाद रासायनिक और भारी उद्योगों को यहां संचालन में कठिनाई हो रही है।
  • नए लाइसेंस पर रोक: कई नए औद्योगिक लाइसेंस और विस्तार योजनाओं को रोक दिया गया है
Tarapur :हरित क्षेत्र नीति से उद्योग प्रभावित, गुजरात जा रहे प्लांट।
Tarapur :हरित क्षेत्र नीति से उद्योग प्रभावित, गुजरात जा रहे प्लांट।

Tarapur से गुजरात क्यों?

  • औद्योगिक अनुकूलता: गुजरात में पर्यावरण नियमों के पालन के साथ-साथ उद्योगों के लिए सुविधाजनक नीतियां अपनाई गई हैं।
  • तेजी से मिल रही अनुमति: गुजरात सरकार उद्योगों को समयबद्ध तरीके से पर्यावरण मंजूरी और आधारभूत संरचना प्रदान कर रही है।
  • नीतिगत स्थिरता: वहां की नीति में पारदर्शिता और उद्योगों के लिए स्थायित्व देखा जा रहा है

उद्योगों पर प्रभाव

  • रोजगार पर असर: Tarapur क्षेत्र में चल रहे इन उद्योगों के बंद या शिफ्ट होने से हजारों स्थानीय लोगों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।
  • राजस्व में गिरावट: महाराष्ट्र को इन उद्योगों से जो टैक्स और रॉयल्टी प्राप्त होती थी, वह अब अन्य राज्यों को जाएगी।
  • आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव: कई कंपनियों की उत्पादन प्रक्रिया और डिस्ट्रीब्यूशन चैन प्रभावित होगी
    • जिससे बाजार में दवाओं, केमिकल्स आदि की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।

क्या कहती हैं कंपनियां?

कई रासायनिक इकाइयों के प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्होंने बार-बार राज्य सरकार से नीति में राहत की मांग की, लेकिन उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

इसके चलते उन्होंने गुजरात जैसे राज्यों में स्थानांतरित होने का निर्णय लिया है।

Tarapur :हरित क्षेत्र नीति से उद्योग प्रभावित, गुजरात जा रहे प्लांट।
Tarapur :हरित क्षेत्र नीति से उद्योग प्रभावित, गुजरात जा रहे प्लांट।

कुछ कंपनियों ने यह भी बताया कि:

  • उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता बेहतर मिल रही है।
  • पर्यावरण नियमों का पालन सरल और डिजिटल हो गया है।
  • व्यापार लागत Tarapur की तुलना में कम है।

सरकार की प्रतिक्रिया

महाराष्ट्र सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट रुख सामने नहीं आया है, लेकिन औद्योगिक संगठनों द्वारा लगातार ज्ञापन देने के बाद उम्मीद है कि कुछ राहत दी जा सकती है। हालांकि, सरकार पर्यावरण संरक्षण के मामले में समझौता करने के मूड में नहीं दिख रही।

हरित क्षेत्र की अनिवार्यता एक तरफ पर्यावरण के लिए सराहनीय कदम है, लेकिन दूसरी तरफ इससे औद्योगिक क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि सरकार उद्योगों और पर्यावरण के बीच संतुलन नहीं बना पाई, तो यह प्रवृत्ति अन्य क्षेत्रों में भी दोहराई जा सकती है। इसलिए ज़रूरत है एक व्यवहारिक नीति की, जो दोनों पक्षों को समान रूप से लाभ पहुंचाए।

digital@vaartha.com

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