नए उद्योग स्थापित किए जाएं या कम से कम दिया जाए उचित मुआवजा
हैदराबाद। नकदी की कमी से जूझ रही कांग्रेस सरकार की नजर अब तेलंगाना में स्थापित विभिन्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (CPSU) की हजारों एकड़ बेकार पड़ी बेशकीमती जमीन पर है। उद्योग एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री डी. श्रीधर बाबू (D. Sridhar Babu) ने केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि या तो ये जमीनें राज्य सरकार को वापस की जाएं, नए उद्योग स्थापित किए जाएं या कम से कम उचित मुआवजा दिया जाए। नई दिल्ली में केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी के साथ बैठक में श्रीधर बाबू ने इस बात पर प्रकाश डाला कि दशकों पहले केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को अत्यधिक रियायती दरों पर आवंटित 7,000 एकड़ से अधिक भूमि अब मृत परिसंपत्ति बन चुकी है।
जनहित के साथ विश्वासघात
इनमें से कई इकाइयां, जिनमें एचएमटी, आईडीपीएल, हिंदुस्तान केबल्स, एचएफएल, सीसीआई और आयुध निर्माणी शामिल हैं, ने परिचालन बंद कर दिया है, जिससे बहुमूल्य भूमि का विशाल भूभाग अनुपयोगी हो गया है। मंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ सीपीएसयू राज्य सरकार से परामर्श किए बिना या उचित मुआवजा दिए बिना इन प्रमुख संपत्तियों को निजी संस्थाओं को हस्तांतरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘यह राज्य के लिए सिर्फ़ वित्तीय नुकसान नहीं है, बल्कि जनहित के साथ विश्वासघात है।’
संभावित समाधान तलाशने के लिए उच्च स्तरीय बैठक बुलाने का किया वादा
उन्होंने केंद्र से सार्वजनिक या विकासात्मक उद्देश्यों के लिए ऐसी ज़मीनों को संरक्षित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने का आग्रह किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जैसे-जैसे तेलंगाना का विकास जारी है, इन ज़मीनों को लोगों की सेवा करनी चाहिए। कुमारस्वामी ने श्रीधर बाबू को आश्वासन दिया कि इस मामले को तत्परता से निपटाया जाएगा तथा संभावित समाधान तलाशने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाने का वादा किया।
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