Tughlaq Rule : हैदराबाद। भाजपा सांसद एटाला राजेंद्र ने गुरुवार को तेलंगाना सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की नीतियों की तुलना “तुगलक शासन” (Tughlaq Rule) से की। निर्मल जिले में भाजपा की “रैतु गोसा-भाजपा भरोसा” यात्रा के दौरान ईटाला राजेंद्र ने आरोप लगाया कि खराब खरीद प्रबंधन और अव्यावहारिक फसल खरीद सीमाओं के कारण किसान परेशान हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को परिवहन और खरीद सुविधाओं के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि भू-स्वामियों से जुड़े बायोमेट्रिक सत्यापन नियमों के कारण बटाईदार किसानों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने मक्का, सफेद ज्वार और सूरजमुखी (Sunflower) की खरीद व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस सरकार से किसानों द्वारा पैदा किए गए प्रत्येक दाने की खरीद के अपने वादे को पूरा करने की मांग की। इस यात्रा में भाजपा विधायक दल के नेता ए. महेश्वर रेड्डी, विधायक रामाराव पटेल, हरीश रेड्डी और वेंकटरामी रेड्डी, विधान परिषद सदस्य मल्का कोमरैया, अंजी रेड्डी और एवीएन रेड्डी सहित कई भाजपा नेता मौजूद रहे।
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तुगलक वंश का मुख्य शासक कौन था?
दिल्ली सल्तनत के इस वंश में कई शासकों ने शासन किया, लेकिन Muhammad bin Tughluq को सबसे प्रमुख शासकों में गिना जाता है। वह अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं और प्रशासनिक प्रयोगों के लिए प्रसिद्ध था। राजधानी परिवर्तन, तांबे के सिक्कों का प्रचलन और विशाल साम्राज्य विस्तार उसकी प्रमुख नीतियों में शामिल थे। हालांकि कई योजनाएं सफल नहीं हो सकीं, फिर भी उसे विद्वान और दूरदर्शी शासक माना जाता है। उसके शासनकाल का भारतीय मध्यकालीन इतिहास में विशेष महत्व बताया जाता है।
इतिहास का सबसे मूर्ख राजा कौन था?
इतिहास में किसी भी शासक को आधिकारिक रूप से सबसे मूर्ख कहना उचित नहीं माना जाता, क्योंकि अलग-अलग घटनाओं और नीतियों के आधार पर लोगों की राय अलग हो सकती है। कई इतिहासकार Muhammad bin Tughluq की कुछ असफल नीतियों का उदाहरण देते हैं, जैसे राजधानी को बदलना और सांकेतिक मुद्रा लागू करना। इन फैसलों के कारण उसे आलोचना का सामना करना पड़ा। हालांकि वह अत्यंत शिक्षित और बुद्धिमान शासक भी माना जाता था, इसलिए इतिहास में उसके व्यक्तित्व को मिश्रित रूप में देखा जाता है।
तुगलक वंश का अंतिम सुल्तान कौन था?
इस वंश का अंतिम शासक Nasir-ud-Din Mahmud Shah Tughluq था। उसके शासनकाल के दौरान सल्तनत काफी कमजोर हो चुकी थी और कई प्रांत स्वतंत्र होने लगे थे। आंतरिक संघर्ष और बाहरी आक्रमणों के कारण शासन व्यवस्था कमजोर पड़ गई। इसी दौर में Timur’s Invasion of India ने दिल्ली सल्तनत को भारी नुकसान पहुंचाया। उसके बाद तुगलक वंश का पतन हो गया और दिल्ली पर दूसरे वंशों का नियंत्रण स्थापित हुआ।
तुगलक वंश का संस्थापक कौन था?
दिल्ली सल्तनत में इस वंश की स्थापना Ghiyas-ud-Din Tughluq ने वर्ष 1320 में की थी। उसने खिलजी वंश के पतन के बाद सत्ता संभाली और प्रशासन को मजबूत करने का प्रयास किया। शासनकाल में कानून व्यवस्था और सीमाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। उसने कई निर्माण कार्य भी करवाए, जिनमें किले और नगर प्रमुख थे। उसके बाद तुगलक वंश ने लगभग एक शताब्दी तक दिल्ली सल्तनत पर शासन किया।
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