BJP VS CPI : हैदराबाद। सीपीआई (CPI) एम के पोलित ब्यूरो सदस्य बी.वी. राघवुलु ने गुरुवार को मोदी सरकार पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाकर लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि धमकियों और मुकदमों के बावजूद माकपा भाजपा (BJP) और “सांप्रदायिक शक्तियों” के खिलाफ अपना संघर्ष और तेज करेगी। हैदराबाद के आरटीसी क्रॉस रोड्स पर केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के विरोध में आयोजित प्रदर्शन को संबोधित करते हुए राघवुलु ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित हमला” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि वामपंथी दलों को कमजोर करने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की जा रही है।
आंदोलन तेज करने का ऐलान
प्रदर्शन की शुरुआत माकपा के राज्य कार्यालय एमबी भवन से आरटीसी क्रॉस रोड्स तक रैली निकालकर की गई। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने भाजपा और ईडी के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने “ईडी-मोदी वापस जाओ”, “पिनराई विजयन पर ईडी छापों की निंदा करो” तथा “भाजपा की राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति का विरोध करो” जैसे नारे लगाए। राघवुलु ने कहा कि पिनराई विजयन के खिलाफ कोई भ्रष्टाचार मामला नहीं है और यहां तक कि ईडी जांच के दायरे में आने वाले आरोपियों ने भी उनका नाम नहीं लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों का लगातार इस्तेमाल कर रही है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का भी उल्लेख
उन्होंने आम आदमी पार्टी के नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया तथा झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी को भी ईडी मामलों में कई बार पूछताछ और अदालतों का सामना करना पड़ा है। हालांकि उन्होंने केरल में माकपा नेताओं पर हुई छापेमारी को लेकर कांग्रेस नेताओं की “चुप्पी” पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वाम दलों को कमजोर करने के लिए कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक मिलीभगत हो सकती है।
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हिरासत में लेने की भी निंदा
राघवुलु ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान माकपा महासचिव एम.ए. बेबी तथा पोलित ब्यूरो सदस्य बृंदा करात को हिरासत में लेने की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एकजुट कर भाजपा के “तानाशाही रवैये” के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए माकपा राज्य सचिव जॉन वेस्ले ने आरोप लगाया कि भाजपा संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर विपक्षी दलों को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस ऐसे मामलों पर चुप रही तो भविष्य में उसे भी इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने बुद्धिजीवियों, लोकतंत्र समर्थकों और आम जनता से मोदी सरकार की “अलोकतांत्रिक नीतियों” का विरोध करने की अपील की।
तेलंगाना में हिंदुओं की आबादी कितनी है?
जनगणना के आंकड़ों के अनुसार राज्य में हिंदू समुदाय सबसे बड़ी आबादी वाला धार्मिक समूह माना जाता है। कुल जनसंख्या में हिंदुओं की हिस्सेदारी लगभग 85 प्रतिशत के आसपास बताई जाती है। इसके अलावा मुस्लिम, ईसाई, सिख, जैन और अन्य धर्मों के लोग भी यहां निवास करते हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में धार्मिक विविधता देखने को मिलती है। राजधानी Hyderabad में विभिन्न समुदायों के लोग मिलजुलकर रहते हैं, जिससे राज्य की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होती है।
तेलंगाना राज्य का मुख्य भोजन क्या है?
यहां के पारंपरिक व्यंजनों में मसालेदार और देसी स्वाद का विशेष महत्व माना जाता है। ज्वार और चावल से बने भोजन का उपयोग अधिक होता है। सरवा पिंडी, सकिनालु, हैदराबादी बिरयानी, पचड़ी और विभिन्न प्रकार की दालें राज्य के लोकप्रिय व्यंजनों में शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ज्वार की रोटी और तीखी सब्जियां आम तौर पर खाई जाती हैं। राजधानी Hyderabad की बिरयानी देश और विदेश में काफी प्रसिद्ध मानी जाती है और इसे राज्य की खास पहचान माना जाता है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री किस जाति से हैं?
वर्तमान मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy सामाजिक रूप से रेड्डी समुदाय से संबंध रखते हैं। यह समुदाय राज्य की राजनीति और कृषि क्षेत्र में प्रभावशाली माना जाता है। उन्होंने लंबे समय तक सक्रिय राजनीति में कार्य किया और बाद में राज्य के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। राजनीतिक जीवन में संगठनात्मक क्षमता और जनसंपर्क के कारण उनकी पहचान मजबूत हुई। राज्य में विभिन्न सामाजिक वर्गों और समुदायों के बीच संतुलन बनाए रखने को उनकी सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में गिना जाता है।
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