तेहरान। ईरान इस समय व्यापक घरेलू अशांति और गंभीर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव के दोहरे संकट से जूझ रहा है। राजधानी तेहरान (Tehran) सहित देश के प्रमुख शहरों जैसे कुम, इस्फहान, मशहद और हमदान में रविवार से ही जोरदार प्रदर्शन जारी हैं।
आर्थिक संकट से भड़का देशव्यापी विरोध
इन प्रदर्शनों की शुरुआत गिरती मुद्रा रियाल, बेकाबू मुद्रास्फीति और कमरतोड़ महंगाई जैसे आर्थिक मुद्दों से हुई थी। स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों द्वारा शुरू की गई इस हड़ताल ने देखते ही देखते एक देशव्यापी सरकार-विरोधी आंदोलन का रूप ले लिया है। अब सड़कों पर प्रदर्शनकारी न केवल आर्थिक सुधारों की मांग कर रहे हैं, बल्कि सत्ताधारी व्यवस्था के खिलाफ भी नारेबाजी कर रहे हैं।
हिंसक झड़पों में 7 की मौत, हालात तनावपूर्ण
सुरक्षा बलों और नागरिकों के बीच हुई हिंसक झड़पों में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है। हालात को काबू में करने के लिए कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव
इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की ‘लॉक्ड एंड लोडेड’ वाली टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया है। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ईरान सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक सैन्य बल का प्रयोग किया, तो अमेरिका मूकदर्शक नहीं बना रहेगा और हस्तक्षेप करेगा।
ईरान का कड़ा जवाब: अमेरिकी सैन्य अड्डे निशाने पर
ईरान ने अमेरिका के इस बयान पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी (Irani) संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने कहा है कि यदि अमेरिका ने देश के आंतरिक मामलों में दखल देने की कोशिश की, तो क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य अड्डे और उनके सुरक्षा बल ईरान के सीधे निशाने पर होंगे। ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनी के सलाहकारों ने भी चेताया कि अमेरिकी दखल पूरे मध्य पूर्व में अराजकता फैला सकता है।
सरकार ने मानी समस्याएं, समाधान सीमित
ईरान के वर्तमान राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्वीकार किया है कि जनता की आजीविका से जुड़ी समस्याएं गंभीर हैं, लेकिन सरकार के पास इन्हें सुलझाने के विकल्प सीमित हैं।
महसा अमीनी के बाद सबसे बड़ा जन-आंदोलन
यह विरोध प्रदर्शन 2022 के महसा अमीनी मामले के बाद ईरान में अब तक का सबसे बड़ा जन-आंदोलन माना जा रहा है। एक तरफ ईरानी अधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को वैध बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ अशांति फैलाने वालों को कड़े परिणाम भुगतने की चेतावनी दे रहे हैं।
अन्य पढ़े: Bihar- सीएम नीतीश का बड़ा ऐलान, अब बुजुर्गों को घर बैठे मिलेगा इलाज
मध्य पूर्व में नए टकराव की आशंका
इजरायल के साथ हालिया तनाव के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती यह जुबानी जंग पूरे मध्य पूर्व को एक नए और खतरनाक संघर्ष की ओर धकेल सकती है।
भूपेश कौन थे?
भूपेश बघेल (जन्म 23 अगस्त 1960), जिन्हें काका के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जिन्होंने 2018 से 2023 तक छत्तीसगढ़ के तीसरे मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया । वह 2014 से 2019 तक छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं।
Read More :