USA- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की शक्तियों पर अंकुश, संसद में प्रस्ताव पारित

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Restrictions on the powers of US President Trump
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मुख्य बातें: 

  • अमेरिकी सीनेट में ट्रंप को बड़ा राजनीतिक झटका
  • चार रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट्स का दिया साथ
  • 81 दिनों से जारी संघर्ष में 10 हजार से अधिक मौतें

वॉशिंगटन,। ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। राष्ट्रपति (Donald Trump) की अपनी ही पार्टी के कई सांसदों ने उनके खिलाफ जाकर सीनेट (Seenet) में विपक्षी डेमोक्रेट्स का साथ दिया। वॉर पावर्स एक्ट के तहत राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाला प्रस्ताव 50-47 मतों से पारित हो गया, जिसे ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

रिपब्लिकन सांसदों ने बदला रुख

सीनेट में हुई वोटिंग के दौरान रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल, सुसान कॉलिन्स, लिसा मुर्कोव्स्की और बिल कैसिडी ने डेमोक्रेट्स के समर्थन में मतदान किया। वहीं, पार्टी के तीन अन्य सांसद वोटिंग से दूर रहे। इस क्रॉस-वोटिंग ने यह संकेत दिया कि ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप की रणनीति पर उनकी ही पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है।

81 दिनों से जारी संघर्ष

खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। करीब 81 दिनों से जारी इस संघर्ष में अब तक 10 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी बंद करना पड़ा है। युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार और अमेरिकी सहयोगी देशों पर भी असर पड़ा है।

अमेरिका पर बढ़ा आर्थिक दबाव

इस सैन्य अभियान में अमेरिका (America) को अब तक करीब 29 अरब डॉलर खर्च करने पड़े हैं। बढ़ते युद्ध खर्च और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, प्रस्ताव को पूरी तरह कानून का रूप देने के लिए डेमोक्रेट्स को सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जो फिलहाल मुश्किल माना जा रहा है।

संवैधानिक अधिकारों पर विवाद

डेमोक्रेट सांसदों का आरोप है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने संविधान में तय सीमाओं का उल्लंघन किया है। वॉर पावर्स एक्ट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति संसद की अनुमति के बिना 60 दिनों से अधिक समय तक सेना तैनात नहीं रख सकते। विपक्ष का दावा है कि यह समयसीमा 1 मई को समाप्त हो चुकी थी। हालांकि, व्हाइट हाउस का कहना है कि युद्धविराम से जुड़ी परिस्थितियों के कारण राष्ट्रपति के पास सेना की तैनाती जारी रखने का अधिकार अभी भी मौजूद है।

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कूटनीतिक समाधान की कोशिशें जारी

युद्ध के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल बातचीत भी जारी है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के सामने शर्तों और प्रतिबंधों से जुड़े प्रस्ताव रखे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी तनाव कम कराने और युद्धविराम लागू कराने के प्रयासों में जुटा हुआ है।

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Anuj Kumar

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Anuj Kumar

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