Budget 2026-27- बजट से पहले परंपरा निभाई गई, राष्ट्रपति मुर्मू ने सीतारमण को दही खिलाया

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राष्ट्रपति मुर्मू
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नई दिल्ली । देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitaraman) संसद में बजट (Budget) पेश कर रही हैं, लेकिन इस बार उनकी शुरुआत कुछ अलग अंदाज में हुई। बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) ने उन्हें दही खिला कर रवाना किया। यह दृश्य चर्चा का विषय बन गया और लोगों के मन में सवाल उठा कि आखिर दही खिलाने के पीछे क्या परंपरा और संदेश छिपा है।

क्यों खिलाया जाता है दही?

दरअसल, भारतीय परंपरा में दही को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। किसी भी महत्वपूर्ण या शुभ कार्य की शुरुआत से पहले दही या दही-चीनी खाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। माना जाता है कि इससे कार्य में सफलता और सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं

दही का उल्लेख वेदों और पुराणों में भी मिलता है। इसे पवित्र भोजन माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दही गणेशजी और लक्ष्मीजी का प्रिय भोग है, इसलिए इसे सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। पूजा-पाठ और विशेष अवसरों पर पंचामृत में भी दही का प्रयोग किया जाता है।

ज्योतिष में दही का महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दही का संबंध चंद्रमा से होता है, जो मन, शांति और मानसिक संतुलन का कारक माना जाता है। दही खाने से मन शांत रहता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इसी वजह से किसी भी अहम काम से पहले दही खाने की सलाह दी जाती है।

स्वास्थ्य से भी जुड़ा है दही

दही सिर्फ आध्यात्मिक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद लाभकारी है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम और प्रोबायोटिक्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। व्यस्त दिनचर्या में भी दही ऊर्जा और संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा

बजट से पहले दही खाने की इस परंपरा ने सोशल मीडिया पर भी खूब सुर्खियां बटोरीं। लोग इसे परंपरा और आधुनिक राजनीति के सुंदर मेल के रूप में देख रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे शुभ संकेत बताते हुए बजट के सफल रहने की कामना की।

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परंपरा और आधुनिकता का संगम

राष्ट्रपति द्वारा वित्त मंत्री को दही खिलाना यह दर्शाता है कि आधुनिक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं का सम्मान आज भी कायम है। बजट जैसे बड़े आर्थिक फैसलों से पहले यह छोटा-सा प्रतीकात्मक कदम समाज, संस्कृति और स्वास्थ्य—तीनों को जोड़ने का संदेश देता है।

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Anuj Kumar

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