Bastar : बस्तर से उठी ‘भूदान’ की नई चेतना, डॉ. राजाराम भूमिहीन आदिवासियों को देंगे जमीन

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भूमिहीन आदिवासियों
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कोंडागांव । बस्तर, छत्तीसगढ़ से ‘भूदान’ की नई चेतना उठी है। देश के बड़े किसानों में शुमार डॉ. राजाराम त्रिपाठी (Dr. Rajaram Tripathi) ने भूमिहीन आदिवासियों को खेती के लिए जमीन देने का फैसला किया है। पंच राज्यों की ‘भूदान स्मृति विचार एवं सद्भावना यात्रा’, जो पूज्य विनोबा भावे जी (Vinoba Bhave) की प्रेरणा से भूदान महायज्ञ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है, का कोंडागांव आगमन एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी पड़ाव बन गया। मां मां दंतेश्वरी हर्बल समूह तथा साथी समाज सिविल संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में इस दल का स्वागत, विचार मंथन बैठक तथा मां दंतेश्वरी हर्बल फॉर्म तथा रिसर्च सेंटर का निरीक्षण भ्रमण का आयोजन विधिवत संपन्न हुआ।

मेरा मॉडल पारंपरिक सहकारी खेती से अलग : डॉ. त्रिपाठी

इस बैठक में प्रमुख रूप से डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने अपने 30 वर्षों के सामूहिक खेती के अनुभव को साझा करते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मॉडल पारंपरिक सहकारी खेती से अलग है और विनोबा भावे के विचारों के अधिक निकट है। डॉ. त्रिपाठी ने अपने खेतों की भूमि का एक ट्रस्ट बनाने का संकल्प व्यक्त किया, जिसके अंतर्गत बस्तर के भूमिहीन आदिवासी भाइयों को कृषि हेतु भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। इस भूमि पर जैविक पद्धति से हर्बल फसलें, मसाले एवं श्रीअन्न की खेती की जाएगी, जिससे सीधे-सीधे आदिवासी किसानों को आर्थिक लाभ प्राप्त होगा, आदिवासी युवाओं को रोजगार मिलेगा तथा पर्यावरण संरक्षण होगा।

भूदान आंदोलन की समकालीन और व्यावहारिक पुनर्व्याख्या बताया

डॉ. त्रिपाठी के इस अभिनव प्रस्ताव का यात्रा दल के प्रमुख रमेश भाई ने हृदय से स्वागत किया तथा इसे भूदान आंदोलन की समकालीन और व्यावहारिक पुनर्व्याख्या बताया। उन्होंने इस दिशा में डॉ. त्रिपाठी को मार्गदर्शन देने का आश्वासन दिया तथा उन्हें शीघ्र ही विनोबा भावे से जुड़े पवनार आश्रम में आमंत्रित भी किया। बैठक को प्रसिद्ध समाजसेवी भूपेश तिवारी ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में रमेश भाई, राकेश पांडे (प्रयागराज), जालंधर भाई (गांधी आश्रम, वर्धा), राजेन्द्र यादव भाई (हरियाणा), विजय ओझा (चारामा) एवं संकेत सारथी सहित अन्य साथियों का अंगवस्त्र से सम्मान किया गया तथा उन्हें बस्तर की प्रसिद्ध काली मिर्च भेंट की गई।

कोंडागांव में विकसित यह मॉडल अद्वितीय : रमेश भाई

रमेश भाई ने कहा कि उन्होंने 35,000 किलोमीटर की यात्रा के दौरान देशभर में अनेक कृषि मॉडल देखे हैं, किंतु कोंडागांव में विकसित यह मॉडल अद्वितीय है। उन्होंने विशेष रूप से 70-80 फीट तक ऊंची काली मिर्च की बेलों, ऑस्ट्रेलियन टीक के साथ मिश्रित खेती, तथा हल्दी, सफेद मूसली और स्टीविया जैसी फसलों के संयोजन की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि यह मॉडल खाद, सिंचाई, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण प्रदूषण, किसानों की आय और युवाओं के रोजगार जैसी ज्वलंत समस्याओं का एक समग्र समाधान प्रस्तुत करता है।

विनोबा भावे के आश्रमों में भी स्थापित होगा नेचुरल ग्रीनहाउस

उन्होंने आगे कहा कि, यह आयोजन न केवल भूदान आंदोलन की स्मृति को पुनर्जीवित करता है, बल्कि उसे वर्तमान संदर्भों में एक नई दिशा देने का सशक्त प्रयास भी सिद्ध हुआ। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि नेचुरल ग्रीनहाउस का यह प्रकल्प विनोबा भावे के आश्रमों में भी स्थापित किया जाएगा, जिसमें डॉ. त्रिपाठी ने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। कार्यक्रम की सफलता में ‘साथी’ संस्था के प्रसिद्ध समाजसेवी भूपेश तिवारी, मां दंतेश्वरी हर्बल समूह की अध्यक्ष दसमति नेताम, शिप्रा त्रिपाठी, निदेशक अनुराग कुमार, शंकर नाग, सुकदेव बघेल, कृष्णा नेताम, बिलची बाई एवं सियाबती नेताम सहित अनेक सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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Ajay Kumar Shukla

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Ajay Kumar Shukla

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