लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने गुरुवार को अपना 70वां जन्मदिन मनाया। इस अवसर को पार्टी ने ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के रूप में मनाया और इसे सिर्फ व्यक्तिगत उत्सव नहीं, बल्कि बड़े राजनीतिक संदेश का माध्यम बनाया गया।
मुख्यमंत्री और विपक्ष ने दी बधाई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) ने सोशल मीडिया के जरिए मायावती को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि मायावती ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में शोषित और उपेक्षित समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
बसपा ने जन्मदिन को संगठनात्मक संदेश में बदला
पार्टी ने जन्मदिन को ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के रूप में मनाया। लखनऊ मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मायावती ने ब्लू बुक ‘मेरे संघर्षमय जीवन एवं बीएसपी मूवमेंट (BSP Movement) का सफरनामा’ भाग-21 और उसके अंग्रेजी संस्करण का विमोचन किया। यह पुस्तक बसपा आंदोलन और मायावती के राजनीतिक संघर्षों का दस्तावेज़ मानी जाती है।
केंद्र और राज्य सरकारों पर मायावती का हमला
जन्मदिन के मौके पर मायावती ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आज की सरकारें बसपा की योजनाओं के नाम बदलकर उन्हें चला रही हैं। उन्होंने जातिवादी पार्टियों पर भी हमला बोला और कहा कि बसपा ने हमेशा सभी जातियों और धर्मों का सम्मान किया है।
ब्राह्मण समाज पर बड़ा बयान
मायावती ने कहा, “ब्राह्मणों को किसी का ‘चोखा-बाटी’ नहीं चाहिए, बल्कि सम्मान चाहिए। बसपा सरकार ने हमेशा सभी समाजों का बराबर ध्यान रखा है।” उन्होंने यह भी कहा कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, दलित और मुस्लिम सभी समुदायों का पार्टी में समान ध्यान रखा गया।
2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी
मायावती ने साफ संकेत दिए कि बसपा भविष्य में सभी चुनाव अकेले लड़ेगी। उन्होंने गठबंधन से मिली परेशानियों और ईवीएम व मतदाता सूची पर सतर्क रहने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
राजनीतिक संदेश और संगठन को मजबूती
विश्लेषकों का मानना है कि 70वें जन्मदिन को बड़े पैमाने पर मनाकर मायावती ने साफ कर दिया है कि बसपा पूरी ताकत के साथ 2027 की तैयारी में जुट चुकी है। ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के जरिए कार्यकर्ताओं में नया उत्साह और संगठन को मजबूत करने का संदेश भी साफ दिखाई दिया।
Read More :