बेल्जियम कोर्ट ने अपहरण के आरोपों को नकारा, प्रत्यर्पण का रास्ता साफ़
नई दिल्ली: भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी(Mehul Choksi) को बेल्जियम की एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस बात का कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है कि भारतीय अधिकारियों के इशारे पर एंटीगुआ में चोकसी का अपहरण किया गया था। चोकसी ने प्रत्यर्पण से बचने के लिए जून 2022 में भारत सरकार पर हनीट्रैप(Honeytrap) के जरिए अपहरण का झूठा आरोप लगाया था, जिसका मकसद कानूनी प्रक्रिया को बाधित करना था। कोर्ट के इस फैसले से चोकसी के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो गया है, जिसे 17 अक्टूबर को एंटवर्प की एक निचली कोर्ट ने पहले ही मंजूरी दे दी थी।
डोमिनिका घटनाक्रम और कोर्ट का मानवाधिकार आश्वासन
चोकसी(Mehul Choksi) मई 2021 में एंटीगुआ से भागकर पड़ोसी देश डोमिनिका पहुँचा था, जहाँ उसे गिरफ्तार कर लिया गया था और उसे 51 दिन जेल में बिताने पड़े। हालाँकि, ब्रिटिश क्वीन की प्रिवी काउंसिल से राहत मिलने के बाद उसे वापस एंटीगुआ भेज दिया गया था। बेल्जियम कोर्ट(Belgian Court) ने अपने फैसले में यह भी कहा कि चोकसी(Mehul Choksi) के खिलाफ अपराधों को गैर-प्रत्यर्पण योग्य अपराध (जैसे राजनीतिक या टैक्स से जुड़े) नहीं माना जा सकता। साथ ही, भारत ने बेल्जियम सरकार को यह आश्वासन दिया है कि प्रत्यर्पण के बाद चोकसी के मानवाधिकारों का हनन नहीं होगा और उसे मुंबई की आर्थर रोड जेल या दिल्ली की तिहाड़ जेल में नियमानुसार सुविधाएँ मिलेंगी।
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₹13,850 करोड़ का घोटाला और आगे की कानूनी चुनौती
मेहुल चोकसी(Mehul Choksi) पर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले में ₹13,850 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है। गिरफ्तारी के समय वह बेल्जियम से स्विट्जरलैंड भागने की कोशिश कर रहा था। बेल्जियम की कोर्ट का हालिया फैसला भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत है, लेकिन चोकसी के पास अभी भी ऊपरी अदालत में अपील करने का अधिकार सुरक्षित है। व्हिसलब्लोअर हरिप्रसाद एसवी ने भी चेतावनी दी है कि चोकसी “बटुए से भरा” होने के कारण यूरोप के सबसे अच्छे वकीलों को हायर करेगा, जिससे उसे भारत वापस लाना इतना आसान काम नहीं होगा, भले ही कोर्ट ने प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी हो।
बेल्जियम की एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील का मुख्य निष्कर्ष क्या है जिसने चोकसी के प्रत्यर्पण का समर्थन किया?
कोर्ट का मुख्य निष्कर्ष यह है कि भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के अपहरण का कोई भी दस्तावेजी सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि यह भारतीय अधिकारियों के कहने पर हुआ। कोर्ट ने यह भी माना कि चोकसी के खिलाफ लगे आरोप गैर-प्रत्यर्पण योग्य अपराधों की श्रेणी में नहीं आते।
डोमिनिका में गिरफ्तारी के बाद मेहुल चोकसी को कानूनी राहत कैसे मिली थी?
मई 2021 में डोमिनिका में गिरफ्तारी के बाद, चोकसी को ब्रिटिश क्वीन की प्रिवी काउंसिल से राहत मिल गई थी। हालाँकि, उसे डोमिनिका की जेल में 51 दिन बिताने पड़े थे। बाद में, उसे वापस एंटीगुआ के हवाले कर दिया गया था, जहाँ की एक अदालत ने उसके खिलाफ दर्ज केस भी खारिज कर दिए थे।
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