नई दिल्ली । अग्निवीरों के लिए सेना ने स्थायी सेवा को लेकर नियमों को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। अगर कोई अग्निवीर परमानेंट सैनिक (Agniveer Permanent Soliders ) बनने से पहले शादीशुदा पाया गया, तो न सिर्फ उसका चयन रद्द होगा, बल्कि वह आवेदन तक नहीं कर पाएगा। सेना के इस फैसले ने हजारों अग्निवीरों (Fire Warriors) के भविष्य से जुड़े सवालों पर अब विराम लगा दिया है।
शादीशुदा अग्निवीर नहीं भर पाएंगे फॉर्म
सेना की गाइडलाइन के अनुसार, अगर कोई अग्निवीर स्थायी सेवा के लिए आवेदन के समय विवाहित पाया जाता है, तो उसका फॉर्म स्वीकार ही नहीं किया जाएगा। यह नियम सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू होगा।
मेरिट के बावजूद होगा आवेदन निरस्त
सेना ने साफ किया है कि योग्यता, प्रदर्शन या सर्विस रिकॉर्ड (Service Record) कितना भी बेहतर क्यों न हो, अगर वैवाहिक स्थिति नियमों के खिलाफ पाई गई तो उम्मीदवार सीधे अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। यानी मेरिट भी इस नियम के आगे कोई राहत नहीं दे पाएगी।
कब तक कुंवारा रहना होगा? सेना ने दिया जवाब
अग्निवीरों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर उन्हें कब तक शादी नहीं करनी होगी। इस पर सेना ने स्पष्ट किया है कि चार साल की सेवा पूरी होने के बाद भी स्थायीकरण की प्रक्रिया में लगभग 4 से 6 महीने का समय लगता है। जब तक अंतिम मेरिट लिस्ट जारी नहीं हो जाती और ज्वाइनिंग नहीं हो जाती, तब तक विवाह से परहेज करना अनिवार्य होगा।
परमानेंट बनने के बाद मिलेगी शादी की आज़ादी
नियमों के मुताबिक, एक बार जब अग्निवीर का नाम स्थायी नियुक्ति की अंतिम सूची में आ जाता है और वह परमानेंट सैनिक के तौर पर ज्वाइन कर लेता है, उसके बाद वह अपनी मर्जी से विवाह कर सकता है।
2026 में होगा पहला बड़ा इम्तिहान
अग्निवीर योजना की शुरुआत 2022 में हुई थी और अब इसका पहला बड़ा फैसला सामने आने वाला है। जून–जुलाई 2026 के आसपास पहले बैच के करीब 20 हजार अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल पूरा होगा।
सिर्फ 25 प्रतिशत को मिलेगा मौका
सेना में स्थायी सेवा के लिए कुल बैच में से केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही चुना जाएगा। यानी हर चार में से सिर्फ एक जवान ही परमानेंट बनने में सफल हो पाएगा।
चयन का आधार क्या होगा
स्थायी चयन लिखित परीक्षा, फिजिकल टेस्ट और पूरे चार साल के सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर किया जाएगा। इन सभी मानकों पर मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी।
कठिन होगी प्रतिस्पर्धा
सीमित सीटों, सख्त नियमों और ऊंचे मानकों के कारण यह प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाली है। हर अग्निवीर को हर स्तर पर खुद को साबित करना होगा।
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क्यों जरूरी है यह नियम
सेना का कहना है कि यह नियम केवल अनुशासन बनाए रखने के लिए नहीं, बल्कि भारतीय सेना की उस परंपरा का हिस्सा है जिसमें प्रशिक्षण और शुरुआती सेवा काल के दौरान जवानों के अविवाहित रहने को प्राथमिकता दी जाती रही है।
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