PFI Target List जज समेत 972 लोगों को बनाया था निशाना एनआईए की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की एक ताज़ा रिपोर्ट में PFI Target List (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) की गहरी साज़िश का पर्दाफाश हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया कि संगठन ने 972 लोगों की एक टारगेट लिस्ट बनाई थी, जिसमें कई उच्च पदस्थ न्यायाधीश, पुलिस अधिकारी, राजनीतिक नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे।
किस तरह तैयार की गई ये लिस्ट
रिपोर्ट के अनुसार, PFI Target List ने इन लोगों को “विचारधारा के दुश्मन” के रूप में चिन्हित किया था।
लिस्ट तैयार करने के लिए सोशल मीडिया प्रोफाइल्स, सार्वजनिक बयानों और धार्मिक विचारों का विश्लेषण किया गया था।
टेक्नोलॉजी और ग्राउंड नेटवर्क का इस्तेमाल करके PFI ने यह जानकारी एकत्र की थी।

जज, नेता और अधिकारी क्यों बने टारगेट
- न्यायिक फैसलों में कट्टरपंथी विचारों के खिलाफ रुख अपनाने वाले जज
- आतंक और हिंसा के मामलों में सख्त कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारी
- कुछ राजनीतिक दलों के नेता जिन्होंने सार्वजनिक मंचों से PFI की आलोचना की थी
NIA ने बरामद किए दस्तावेज़ और डिजिटल सबूत
NIA ने हाल ही में हुई छापेमारी में PFI से जुड़े कई डिजिटल डिवाइसेज़, दस्तावेज़ और हार्ड ड्राइव जब्त किए।
इनमें से कुछ में टारगेट लिस्ट के अलावा उन पर की जाने वाली रणनीति के संकेत भी मिले।
सूत्रों के अनुसार, लिस्ट में शामिल कुछ लोगों पर निगरानी भी रखी जा रही थी।

सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ी
- NIA और अन्य खुफिया एजेंसियों ने संबंधित राज्यों को अलर्ट जारी किया है
- टारगेट बनाए गए व्यक्तियों को अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराई गई है
- इस साजिश को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जा रहा है
PFI Target List की यह साजिश न सिर्फ कानून व्यवस्था के लिए, बल्कि लोकतंत्र की मूलभूत संरचना के लिए भी एक बड़ा खतरा है।
NIA की रिपोर्ट इस बात का स्पष्ट संकेत देती है कि आतंक की विचारधारा अब एक सोची-समझी रणनीति में तब्दील हो चुकी है।
सरकार द्वारा PFI पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद इस रिपोर्ट का आना और भी ज्यादा अहम हो जाता है।
आप अगला टॉपिक दें, मैं उसी फॉर्मेट में तैयार कर दूंगा।