नई दिल्ली,। संसद के बजट सत्र (Budget Session) का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत ही राजनीतिक रूप से काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि पहले ही दिन लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
भाजपा और कांग्रेस ने जारी किया तीन-लाइन व्हिप
इस मुद्दे को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस (BJP and Congress) दोनों ने अपने-अपने लोकसभा सांसदों को 9 से 11 मार्च तक सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के लिए तीन-लाइन व्हिप जारी किया है। कांग्रेस ने अपने सांसदों को निर्देश दिया है कि वे इन दिनों सदन में उपस्थित रहें, क्योंकि विपक्ष की ओर से लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। वहीं सत्तारूढ़ भाजपा ने भी अपने सांसदों को सदन में मौजूद रहने का निर्देश देते हुए महत्वपूर्ण मतदान के लिए तैयार रहने को कहा है।
स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर
दरअसल, विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को उनके पद से हटाने के लिए प्रस्ताव का नोटिस दिया है। इस प्रस्ताव पर विपक्ष के 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस (Trinmul Congress) के 29 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसके बावजूद पार्टी सूत्रों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के सांसद पार्टी नेतृत्व के निर्देश के अनुसार प्रस्ताव का समर्थन कर सकते हैं और मतदान के दौरान स्पीकर के खिलाफ वोट देने की संभावना है।
विपक्ष ने लगाया पक्षपात का आरोप
विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही के संचालन में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और कई मौकों पर विपक्षी नेताओं को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया। इसी आरोप के आधार पर उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव लाया गया है।
संख्या बल के कारण प्रस्ताव पारित होने की संभावना कम
संसदीय नियमों के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है। हालांकि मौजूदा लोकसभा की संख्या बल को देखते हुए इस प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम मानी जा रही है। वर्तमान में एनडीए के पास लगभग 290 से अधिक सांसदों का समर्थन है, जो प्रस्ताव को पारित होने से रोकने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
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चर्चा के दौरान स्पीकर नहीं करेंगे सदन की अध्यक्षता
प्रक्रिया के तहत जब इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी, तब लोकसभा अध्यक्ष स्वयं सदन की अध्यक्षता नहीं करेंगे। हालांकि उन्हें अपनी बात रखने और प्रस्ताव पर होने वाले मतदान में हिस्सा लेने का अधिकार होगा। बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत से पहले ही इस मुद्दे ने संसद के भीतर के राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है।
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