Alert : 151 गांवों में 128 गर्भवती महिलाओं को मानसून के दौरान हो सकती है दिक्कत

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बारिश के चलते गांव कटे तो अस्पतालों में पहुंचना होगा मुश्किल

कुमराम भीम आसिफाबाद। जिले के दूरदराज के इलाकों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को मानसून के दौरान मुश्किल दिनों का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने 151 गांवों की पहचान की है, जो नदियों और नालों के उफान के कारण कट सकते हैं। इन गांवों में 128 गर्भवती महिलाएं हैं, जिनके जून और अगस्त के बीच प्रसव होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर आ गईं तो इन महिलाओं को नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों या उप-केंद्रों तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है।

आसिफाबाद मंडल के गुंडी गांव में चार गर्भवती महिलाएं

उदाहरण के लिए, आसिफाबाद मंडल के गुंडी गांव में चार गर्भवती महिलाएं हैं , जिनकी डिलीवरी अगस्त में होने की उम्मीद है। अगर स्थानीय नाले में बाढ़ आती है, तो उन्हें जिला मुख्यालय अस्पताल पहुंचने के लिए 25 किलोमीटर की यात्रा करनी होगी। नाले पर बना एक अस्थायी पुल हाल ही में बह गया, जिससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2018 से 2024 के बीच, पूर्ववर्ती आदिलाबाद जिले में प्रसव के दौरान लगभग 100 गर्भवती महिलाओं की मृत्यु हुई। इनमें से ज़्यादातर मौतें खराब सड़क संपर्क और नदियों पर पुलों की अनुपस्थिति के कारण हुईं, जिससे समय पर अस्पताल पहुंचना मुश्किल हो गया।

कुछ साल पहले गर्भवती महिला की अस्पताल ले जाते हुई थी मौत

ऐसी ही एक घटना में, बेज्जुर मंडल के येलकापल्ली गांव की दिहाड़ी मजदूर और सलीम की पत्नी फरजाना बेगम (28) की कुछ साल पहले अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई थी। इसी तरह, सुलुगुपल्ली गांव की पूर्णकालिक गर्भवती महिला बोडुना सरिता (32) की 2018 में मंचेरियल के एक अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई थी। आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता कोटनाका विजय ने कहा, ‘आंतरिक गांवों में रहने वाली महिलाओं का सुरक्षित प्रसव तभी हो सकता है जब वे समय पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें। जिले में पिछले सालों में परिवहन के दौरान कई मातृ मृत्यु देखी गई है। मानसून यहां गर्भवती महिलाओं के लिए अतिरिक्त चुनौतियां लेकर आता है।’

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गर्भवती महिलाओं को असुविधा से बचाने के लिए किए जा रहे प्रयास

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस साल गर्भवती महिलाओं को असुविधा से बचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं की पहचान कर ली गई है और हाल ही में गठित समितियों द्वारा उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी की जा रही है। निकटवर्ती स्वास्थ्य केन्द्रों पर दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा।

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