हैदराबाद। तेलंगाना भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने शमशाबाद मंडल स्थित तहसीलदार एवं कार्यकारी मजिस्ट्रेट तथा संयुक्त उप-पंजीयक कार्यालय में औचक निरीक्षण कर गंभीर अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार का खुलासा किया है। एसीबी के अनुसार 8 मई से की गई इस छापेमारी में कई नियम उल्लंघन और संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं। निरीक्षण के दौरान तहसीलदार के. रविंदर दत्त के वाहन के डैशबोर्ड (Dashboard) से 2.60 लाख रुपये की अघोषित नकदी बरामद की गई। इसी तरह राजस्व निरीक्षक जी. कृष्णा के पास से 2.29 लाख रुपये की बिना हिसाब की नकदी मिली, जिन्हें कथित तौर पर पैसे छिपाने और एक फाइल को शौचालय की छत पर रखने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया।
10 हजार रुपये की अघोषित नकदी भी की गई जब्त
इसके अलावा लाइसेंस प्राप्त सर्वेयर एस. पृथ्वीराज के पास से 10 हजार रुपये की अघोषित नकदी भी जब्त की गई। एसीबी ने यह भी पाया कि कार्यालय में व्यक्तिगत नकदी रजिस्टर का रखरखाव नहीं किया जा रहा था और 68 मीसेवा आवेदन निर्धारित समय सीमा से अधिक समय से लंबित थे। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि तहसीलदार के. रविंदर दत्त ने कथित रूप से अपनी अधिकार सीमा से बाहर जाकर और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के बिना कुछ प्रमाण पत्र और आदेश जारी किए। अधिकारियों के अनुसार कुछ मामलों में उन्होंने भूमि सुधार न्यायाधिकरण की शक्तियों का प्रयोग करते हुए भूमि संबंधी आदेश जारी किए।
एसीबी ने यह भी पाया कि शमशाबाद, टोंडुपल्ली और सथमराय गांवों के विभिन्न सर्वे नंबरों से संबंधित कुछ आदेश कथित रूप से निजी पक्षों के पक्ष में जारी किए गए, जिससे सरकारी संपत्ति और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। ब्यूरो ने निष्कर्ष निकाला कि तहसीलदार ने अपने कर्तव्यों का उचित और नियमों के अनुसार पालन नहीं किया तथा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्य किया।
तेलंगाना में हिंदुओं की आबादी कितनी है?
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की कुल आबादी में लगभग 85 प्रतिशत लोग हिंदू धर्म को मानते हैं। इसके अलावा मुस्लिम, ईसाई, सिख और अन्य समुदायों के लोग भी यहां निवास करते हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता इस क्षेत्र की प्रमुख विशेषताओं में गिनी जाती है। बोनालू, बथुकम्मा और दशहरा जैसे त्योहार बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मंदिरों और पारंपरिक धार्मिक आयोजनों का महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
तेलंगाना राज्य का मुख्य भोजन क्या है?
चावल यहां का प्रमुख भोजन माना जाता है और इसे दाल, सांभर तथा विभिन्न सब्जियों के साथ खाया जाता है। मसालेदार स्वाद वाले व्यंजन इस क्षेत्र की खास पहचान हैं। हैदराबादी बिरयानी दुनियाभर में प्रसिद्ध मानी जाती है। इसके अलावा सरवा पिंडी, जोन्ना रोट्टे, सकिनालु और पचड़ी जैसे पारंपरिक व्यंजन भी काफी लोकप्रिय हैं। लाल मिर्च, इमली और देसी मसालों का उपयोग भोजन को विशेष स्वाद देता है। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में पारंपरिक खानपान की मजबूत पहचान देखने को मिलती है।
तेलंगाना का दूसरा नाम क्या है?
ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र को “त्रिलिंग देश” कहा जाता था। माना जाता है कि यह नाम तीन प्रमुख शिव मंदिरों — कालेश्वरम, श्रीशैलम और द्राक्षारामम — से जुड़ा हुआ है। समय के साथ यही शब्द बदलकर वर्तमान नाम बना। दक्षिण भारत की संस्कृति, भाषा और परंपराओं में इस क्षेत्र की अलग पहचान रही है। वर्ष 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होकर इसे नया राज्य बनाया गया। आईटी उद्योग, ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक उत्सवों के कारण यह देश के महत्वपूर्ण राज्यों में गिना जाता है।
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