तेलंगाना में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने हेतु उठा कदम
हैदराबाद। तेलंगाना में ऊर्जा दक्षता और सतत विकास को प्रोत्साहन देने के लिए तेलंगाना नवीकरणीय ऊर्जा विकास निगम (Telangana Renewable Energy Development Corporation) और वैश्विक हरित विकास संस्थान के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता टीजीरेडको की प्रबंध निदेशक अनिला वाविला और जीजीजीआई भारत के प्रतिनिधि सौम्य प्रसाद गरनायक के बीच संपन्न हुआ। इस अवसर पर ऊर्जा विभाग के विशेष मुख्य सचिव नवीन मित्तल उपस्थित रहे। यह पहल ‘स्मार्टी-बी’ कार्यक्रम के अंतर्गत की गई है, जिसका उद्देश्य भवन क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देना और नवीन वित्तीय व्यवस्थाओं के माध्यम से सुधारों को तेज करना है। समझौते के अंतर्गत दोनों संस्थाएं मांग प्रबंधन, सतत शीतलन, ऊर्जा दक्ष भवन (Energy-Efficient Building), हरित लघु एवं मध्यम उद्यम तथा विद्युत वाहन जैसे क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य करेंगी।
संस्थागत क्षमता निर्माण पर दिया जाएगा विशेष ध्यान
साथ ही व्यवहार्य परियोजनाओं का विकास, नवीन वित्तीय मॉडल और संस्थागत क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस सहयोग से राज्य को वैश्विक तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा, जिससे तेलंगाना कम कार्बन उत्सर्जन, ऊर्जा संरक्षण और सतत विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगा। अधिकारियों ने बताया कि यह पहल नीतिगत ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ ऊर्जा दक्ष तकनीकों को अपनाने में मदद करेगी और हरित निवेश तथा रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी। यह समझौता तेलंगाना की सतत विकास की प्रतिबद्धता और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए नवाचार आधारित प्रयासों को और सुदृढ़ करता है।

हरित विकास क्या है?
अर्थ ऐसा विकास मॉडल होता है, जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाती है। इसमें प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग, प्रदूषण में कमी और जैव विविधता की रक्षा शामिल होती है। लक्ष्य यह होता है कि वर्तमान जरूरतें पूरी हों, लेकिन भविष्य की पीढ़ियों पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। इसी कारण इसे सतत विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
हरित विकास के लेखक कौन हैं?
किसी एक निश्चित लेखक का नाम निर्धारित नहीं है, क्योंकि यह कोई एक पुस्तक या रचना नहीं बल्कि एक व्यापक अवधारणा है। विभिन्न पर्यावरणविदों, अर्थशास्त्रियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इसे विकसित और प्रचलित किया है। कई शोध पत्रों और नीतिगत दस्तावेजों में इसका उल्लेख मिलता है, इसलिए इसे सामूहिक विचार के रूप में समझा जाता है।
हरित विकास किसे कहते हैं?
कहा जाता है ऐसे विकास को, जिसमें पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और समाज के बीच संतुलन बनाए रखा जाता है। इसमें ऊर्जा की बचत, नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग और प्रदूषण नियंत्रण पर जोर दिया जाता है। उद्देश्य यह होता है कि विकास की प्रक्रिया प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना आगे बढ़े। इसी संतुलित दृष्टिकोण को हरित विकास की संज्ञा दी जाती है।
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