हैदराबाद। आरटीसी कर्मियों की 32 मांगों का समाधान कांग्रेस (Congress) सरकार की जनहितकारी नीतियों का स्पष्ट प्रमाण है। यह बात आईएनटीयूसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद जी. संजीव रेड्डी ने कही। उन्होंने कहा कि आरटीसी कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान और हड़ताल समाप्त कराने में आईएनटीयूसी ने अहम भूमिका निभाई है। शनिवार को शहर के डीडी कॉलोनी स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने यह जानकारी दी। इस अवसर पर आईएनटीयूसी के राज्य मुख्य उपाध्यक्ष मोगुल्ला राजी रेड्डी, राज्य महासचिव आर.डी. चंद्रशेखर, आरटीसी (RTC) स्टाफ एंड वर्कर्स यूनियन (आईएनटीयूसी) के महासचिव जक्कुला मल्लेश गौड़ तथा वर्किंग प्रेसिडेंट गोडिशाला अब्राहम उपस्थित थे।
52 दिनों तक की थी लंबी हड़ताल
जी. संजीव रेड्डी ने कहा कि पूर्व बीआरएस सरकार के दौरान आरटीसी कर्मियों ने अपनी मांगों के समाधान के लिए 52 दिनों तक लंबी हड़ताल की थी, लेकिन उस समय सरकार ने कोई सकारात्मक पहल नहीं की और कर्मचारियों के साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया। उन्होंने बताया कि उस हड़ताल के दौरान 34 कर्मचारियों की मृत्यु हो गई थी। इसके विपरीत, वर्तमान कांग्रेस सरकार ने मात्र तीन दिनों के भीतर आरटीसी कर्मचारी संगठनों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से वार्ता कर सभी 32 मांगों को स्वीकार कर लिया और हड़ताल समाप्त कराई। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क, परिवहन मंत्री पोनम प्रभाकर तथा राज्यसभा सदस्य वेम नरेंद्र रेड्डी का आभार व्यक्त किया।
11 प्रतिशत फिटमेंट के साथ वेतन संशोधन को मंजूरी दी
उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार ने आरटीसी कर्मियों के लिए 11 प्रतिशत फिटमेंट के साथ वेतन संशोधन को मंजूरी दी है, जो सराहनीय कदम है। साथ ही, आरटीसी के सरकारीकरण के मुद्दे पर मंत्रिमंडल उपसमिति गठित कर 2 जून को निर्णय घोषित करने का आश्वासन दिया गया है। कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघ के चुनाव कराने की घोषणा भी स्वागतयोग्य है। हड़ताल के दौरान आत्महत्या का प्रयास करने वाले चालक शंकर गौड़ की मृत्यु को दुखद बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके परिवार को शीघ्र मुआवजा दिलाने के प्रयास किए जाएंगे। इस मौके पर मोगुल्ला राजी रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने आरटीसी कर्मियों का दशकों पुराना सपना साकार किया है और भविष्य में भी कर्मचारियों के साथ खड़ी रहेगी।
जनहित शब्द का क्या अर्थ है?
जनहित का अर्थ है जनता के लाभ, भलाई और कल्याण से जुड़ा कार्य। जब कोई निर्णय, योजना या कार्य समाज के अधिक लोगों के फायदे के लिए किया जाता है, तो उसे जनहित कहा जाता है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी, सुरक्षा और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। सरकार और संस्थाएं अक्सर जनहित को ध्यान में रखकर नीतियां बनाती हैं ताकि लोगों का जीवन बेहतर हो सके।
छरहरा को क्या कहते हैं?
ऐसे व्यक्ति को, जिसका शरीर पतला, संतुलित और सुडौल हो, छरहरा कहा जाता है। यह शब्द अक्सर अच्छे शारीरिक गठन के लिए उपयोग किया जाता है। छरहरा शरीर का मतलब बहुत कमजोर नहीं, बल्कि फिट और संतुलित शरीर होता है। हिंदी में इसे दुबला-पतला, सुडौल या संतुलित शरीर वाला भी कहा जा सकता है। यह शब्द सामान्यतः सकारात्मक अर्थ में प्रयोग होता है।
“विषयी” का क्या अर्थ है?
विषयी शब्द का अर्थ संदर्भ के अनुसार बदल सकता है। सामान्य रूप से इसका मतलब किसी विषय से संबंधित व्यक्ति या बात होता है। धार्मिक और दार्शनिक संदर्भ में यह शब्द भौतिक सुखों, इच्छाओं और सांसारिक भोगों में रुचि रखने वाले व्यक्ति के लिए भी प्रयोग किया जाता है। यानी जो व्यक्ति इंद्रिय सुखों और सांसारिक आकर्षणों में अधिक लगा रहता है, उसे भी विषयी कहा जाता है।
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