हैदराबाद। राज्य सरकार ने इंटरमीडिएट छात्रों के लिए मध्याह्न भोजन योजना (Mid-day Meal Scheme) लागू करने की घोषणा के बाद, तेलंगाना के जूनियर कॉलेजों में मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की तस्वीरों पर पालाभिषेक करने के दृश्य सामने आए हैं। छात्र, शिक्षक और स्थानीय लोग इस योजना के लिए अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए, तस्वीरों पर दूध और पानी से अभिषेक कर रहे हैं, जिससे उत्सव जैसा माहौल बन गया है। यह नई पहल छात्रों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके शैक्षिक विकास में सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाती है। विश्लेषकों का कहना है कि राज्य सरकार की इस योजना सहित अन्य शैक्षिक और कल्याणकारी कदमों से छात्रों के जीवन में सकारात्मक बदलाव (Positive Change) आएंगे और उनके पोषण व शिक्षा स्तर में सुधार होगा।
मध्याह्न भोजन का क्या अर्थ है?
स्कूलों में बच्चों को दोपहर के समय दिया जाने वाला मुफ्त भोजन इस योजना का मुख्य उद्देश्य होता है। इसे बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने और स्कूल में उपस्थिति बढ़ाने के लिए शुरू किया गया है। Mid-Day Meal Scheme के तहत सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को संतुलित आहार प्रदान किया जाता है, ताकि उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर हो सके।
मध्यान भोजन का दूसरा नाम क्या है?
इसे आमतौर पर Mid-Day Meal Scheme के नाम से जाना जाता है। कई राज्यों में इसे “पीएम पोषण योजना” (PM POSHAN) भी कहा जाता है। नाम भले ही अलग हो, लेकिन इसका उद्देश्य एक ही है—स्कूल के बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और शिक्षा के प्रति उनकी रुचि बढ़ाना।
मध्यान भोजन का मेनू क्या है?
इस योजना के तहत मेनू राज्यों के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है, लेकिन आम तौर पर इसमें दाल-चावल, खिचड़ी, रोटी-सब्जी, फल और कभी-कभी दूध या अंडा शामिल किया जाता है। Mid-Day Meal Scheme का मेनू इस तरह तैयार किया जाता है कि बच्चों को आवश्यक प्रोटीन, विटामिन और ऊर्जा मिल सके, जिससे उनका स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों बेहतर हो सकें।
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