Breaking News: GDP: भारत की ग्रोथ रफ्तार अब नई दिशा

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दूसरी छमाही पर नजरें टिकीं

नई दिल्ली: चालू वित्त वर्ष में भारत(India) की जीडीपी(GDP) ग्रोथ 6.5% से बढ़कर 7% रहने की संभावना जताई गई है। क्रिसिल ने यह संशोधित अनुमान पहली छमाही में उम्मीद से अधिक 8% की तेज वृद्धि के आधार पर जारी किया है। सितंबर में समाप्त दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी(GDP) 8.2% रही, जिसने पूर्वानुमानों को पीछे छोड़ दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार दूसरी छमाही में अमेरिकी टैरिफ(Tariff) नीतियों के प्रभाव से ग्रोथ 6.1% रह सकती है, जिससे आर्थिक रफ्तार कुछ नियंत्रित हो सकती है।

क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने बताया कि निजी खपत आर्थिक विस्तार का मुख्य स्तंभ रही। उन्होंने कहा कि महंगाई कम होने से वैकल्पिक खर्च बढ़ा है और सप्लाई साइड पर मैन्युफैक्चरिंग तथा सेवा क्षेत्र दोनों ने उल्लेखनीय सुधार दिखाया

तेज मांग और मजबूत उपभोग की भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई-सितंबर तिमाही की 8.2% वृद्धि घरेलू मांग, सेवा निर्यात और नियंत्रित महंगाई के सम्मिलित प्रभाव का परिणाम है। भारतीय स्टेट बैंक की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, देश की ग्रोथ स्टोरी नई दिशा में आगे बढ़ रही है, और वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही छह तिमाहियों का सर्वोच्च स्तर दर्ज करती है, जो देश की आर्थिक क्षमता का स्पष्ट प्रमाण है।

एसबीआई की रिपोर्ट बताती है कि मजबूत निजी उपभोग, अमेरिकी शुल्कों के बीच अग्रिम निर्यात और 5.6% की निर्यात वृद्धि ने परिणामों को स्थिर रखा। ऊँची कीमतों और वैश्विक सुस्ती के संकेतों के बावजूद सालाना आधार पर सुधार दर्ज किया गया है, जिसने समग्र अर्थव्यवस्था में विश्वास को बल दिया है।

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टैरिफ प्रभाव से कैसे बदलेगा परिदृश्य

इसके अलावा, रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है कि आगे आने वाले महीनों में जीडीपी का औसत विकास दर लगभग 6.6% रह सकता है। इसका कारण आधार प्रभाव में कमी, सरकारी व्यय की सामान्य गति और अमेरिकी टैरिफ के कारण वैश्विक मांग में बदलाव बताया गया है। विश्लेषकों का कहना है कि निर्यात पर दबाव कुछ सीमा तक विकास दर को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि, उद्योग जगत ने इसे मजबूत अनुकूलन क्षमता का संकेत माना है। महिंद्रा समूह के प्रबंध निदेशक अनिश शाह ने कहा कि घरेलू मांग और संसाधन प्रबंधन ने विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों को उभरने का अवसर दिया है। एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल कुमार मिंडा ने कहा कि नीतिगत स्थिरता और सुधारों का प्रभाव अब वास्तविक विकास में परिवर्तित हो रहा है, जो अर्थव्यवस्था की मजबूती को मजबूत करता है।

क्या आगे जीडीपी की गति धीमी हो सकती है?

दूसरी छमाही में वैश्विक सुस्ती और अमेरिकी शुल्कों का प्रभाव निर्यात क्षेत्र पर दबाव बना सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि 7% वार्षिक अनुमान मजबूत रहेगा, लेकिन मासिक वृद्धि में उतार-चढ़ाव संभव हैं।

विकास में निजी उपभोग की कितनी भूमिका रहेगी?

निजी खर्च अभी भी जीडीपी वृद्धि का प्रमुख आधार है और शहरी बाजारों में मांग लगातार बढ़ रही है। सेवा क्षेत्र और मैन्युफैक्चरिंग के प्रदर्शन से भी विकास को निरंतर समर्थन मिलने की संभावना है।

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Dhanarekha

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