भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल की आशंका
नई दिल्ली: ईरान द्वारा खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों पर किए गए हमलों ने वैश्विक तेल(Global Energy Crisis) और गैस बाजार में हड़कंप मचा दिया है। दुनिया के सबसे बड़े LNG हब, कतर के ‘रास लफ्फान’ प्लांट को भारी नुकसान के बाद बंद कर दिया गया है, जो वैश्विक आपूर्ति का 20% हिस्सा संभालता है। इसके अलावा, सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ मार्ग लगभग बंद होने की कगार पर है। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% LNG इसी रास्ते से मंगाता है। इस मार्ग पर असुरक्षा के कारण टैंकरों की आवाजाही रुक गई है, जिससे सप्लाई बाधित हुई है और कीमतें आसमान छू रही हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर: ‘इंडियन बास्केट’ और महंगाई का दबाव
जंग शुरू होने के बाद से भारत के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत(Global Energy Crisis) लगभग दोगुनी होकर 146 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में 30% की यह तेजी सीधे तौर पर घरेलू बाजार को प्रभावित(Affected) करेगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि कीमतें इसी स्तर पर टिकी रहीं, तो पेट्रोल और डीजल के दाम 10 से 15 रुपए तक बढ़ सकते हैं। सरकारी तेल कंपनियां वर्तमान में घाटा सहकर कीमतों को स्थिर रखे हुए हैं, लेकिन लंबे समय तक इसे रोकना मुश्किल होगा।
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चौतरफा महंगाई: केवल ईंधन नहीं, थाली भी होगी महंगी
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का असर केवल वाहनों के ईंधन तक सीमित नहीं रहता। डीजल की कीमतें बढ़ने से माल ढुलाई(Global Energy Crisis) महंगी हो जाती है, जिससे फल, सब्जी और अनाज के दाम बढ़ जाते हैं। इसके अतिरिक्त, कच्चा तेल पेंट, प्लास्टिक, फर्टिलाइजर और दवाइयों के निर्माण में एक अनिवार्य कच्चे माल के रूप में उपयोग होता है। यूरोप और ब्रिटेन में गैस की कीमतों में आई 140% तक की भारी तेजी वैश्विक मुद्रास्फीति को और बढ़ावा देगी, जिसका असर अंततः भारतीय आम आदमी के बजट पर पड़ेगा।
कच्चे तेल के तीन मुख्य बेंचमार्क में क्या अंतर है?
ब्रेंट क्रूड’ उत्तरी सागर से निकलता है और दुनिया के दो-तिहाई तेल सौदे इसी के भाव पर होते हैं। ‘WTI’ अमेरिका का मुख्य मानक है जो अपनी शुद्धता के लिए जाना जाता है। वहीं, ‘OPEC बास्केट’ सऊदी अरब, ईरान और इराक जैसे देशों के तेल का औसत मिश्रण है। भारत मुख्य रूप से ब्रेंट और ओपेक बास्केट से अपनी जरूरतें पूरी करता है।
क्या भारत की एनर्जी सुरक्षा खतरे में है?
पेट्रोलियम मंत्री के अनुसार, भारत की एनर्जी सिक्योरिटी फिलहाल सुरक्षित है और सरकार ने पर्याप्त इंतजाम किए हैं। हालांकि, चुनौती सप्लाई रूट (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के असुरक्षित होने से है। अगर यह तनाव हफ्तों तक खिंचता है, तो कीमतों को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
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