कालाबाजारी का बढ़ता जाल और ‘फैंटम डिलीवरी’
नई दिल्ली: देशभर में रसोई गैस(LPG) की भारी किल्लत के बीच सिलेंडरों की कालाबाजारी(Black Marketing) तेज हो गई है। लोकलसर्किल्स के सर्वे के अनुसार, करीब 20% परिवारों को मजबूरी में ब्लैक में सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है, जिसके लिए उन्हें ₹4,000 तक की अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि 12% उपभोक्ताओं को ‘फैंटम डिलीवरी’ के मैसेज मिल रहे हैं—यानी सिलेंडर घर पहुँचा नहीं, लेकिन कागजों पर डिलीवरी सफल दिखाई जा रही है। डिजिटल सिस्टम की इस खामी ने उपभोक्ताओं की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।
सप्लाई चेन पर ‘होर्मुज’ संकट का असर
भारत में गैस की कमी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक(LPG) तनाव है। ईरान-इजराइल युद्ध के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जलमार्ग लगभग बंद है, जहाँ से भारत अपनी जरूरत का 54% LNG आयात करता है। इसके अलावा, दुनिया के सबसे बड़े LNG हब, कतर के रास लफ्फान प्लांट पर हमलों के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई है। इस संकट की वजह से केवल 28% परिवारों को ही समय पर सिलेंडर मिल पा रहा है, जबकि ग्रामीण इलाकों में लोग फिर से लकड़ी और उपलों पर निर्भर होने को मजबूर हैं।
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सरकार की कार्रवाई और निगरानी
बढ़ती शिकायतों के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ने सख्त कदम उठाए हैं। जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए देशभर में 4,500 से ज्यादा छापेमारी की गई है, जिनमें से अकेले उत्तर प्रदेश में 1,100 छापे मारे गए। सरकार ने 32 राज्यों में कंट्रोल रूम स्थापित(LPG) किए हैं और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को औचक निरीक्षण के निर्देश दिए हैं। हालांकि मंत्रालय का दावा है कि ‘पैनिक बुकिंग’ में कमी आई है, लेकिन धरातल पर अब भी 68% घरों को डिलीवरी में देरी का सामना करना पड़ रहा है।
भारत में वर्तमान LPG संकट के पीछे दो सबसे बड़े वैश्विक कारण क्या हैं?
पहला कारण कतर के ‘रास लफ्फान’ (LNG हब) प्लांट का बंद होना है, और दूसरा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जलमार्ग का असुरक्षित होना है, जिससे भारत का 54% LNG आयात प्रभावित हुआ है।
सर्वे के अनुसार उपभोक्ताओं को किस तरह की डिजिटल धोखाधड़ी का सामना करना पड़ रहा है?
उपभोक्ताओं को ‘फैंटम डिलीवरी’ के फर्जी SMS मिल रहे हैं। इसमें ग्राहक के पास सिलेंडर पहुँचे बिना ही बुकिंग को ‘डिलीवर’ दिखा दिया जाता है, जिससे आधिकारिक रिकॉर्ड और वास्तविक सप्लाई में अंतर आ रहा है।
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