टाटा स्टील और हिंदुस्तान कॉपर के शेयरों में 14% तक की सेंध
नई दिल्ली: पिछले एक महीने में भारतीय शेयर बाजार के मेटल इंडेक्स(Metal Sector) में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के तनाव और वैश्विक अस्थिरता के कारण हिंदुस्तान कॉपर (14%), हिंदुस्तान जिंक (13%) और टाटा स्टील (11%) जैसे बड़े शेयरों में भारी गिरावट आई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती(Cut) न करने के फैसले और डोनाल्ड ट्रंप की सख्त टैरिफ नीतियों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे मेटल स्टॉक्स पर दबाव साफ दिख रहा है।
गिरावट के मुख्य कारण: युद्ध, महंगाई और लॉजिस्टिक्स
मेटल सेक्टर में इस ‘कोहराम’ के पीछे तीन प्रमुख वजहें हैं। पहला, ईरान-इजराइल(Metal Sector) युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर उत्पादन लागत बढ़ गई है। दूसरा, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं, जिससे माल ढुलाई का खर्च और समय (10-20 दिन) दोनों बढ़ गए हैं। तीसरा, अमेरिकी फेड चेयरमैन का ब्याज दरों को लेकर कड़ा रुख मेटल इंडस्ट्री के लिए नकारात्मक साबित हो रहा है।
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एक्सपर्ट्स की राय: क्या यह खरीदारी का मौका है?
गिरावट के बावजूद एलारा कैपिटल जैसी संस्थाओं का मानना है कि भविष्य में रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं। हॉट-रोल्ड कॉइल(Metal Sector) और प्राइमरी रीबार की कीमतों में क्रमशः 13% और 20% की बढ़ोतरी हुई है, जो स्टील कंपनियों के मार्जिन को सुधार सकती है। चूंकि दुनिया का 8% एल्युमीनियम मिडिल ईस्ट से आता है, वहां युद्ध के कारण सप्लाई घटने से कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। निवेशकों की नजर अब अप्रैल में होने वाली RBI की मौद्रिक नीति बैठक पर है, जो बाजार की अगली दिशा तय करेगी।
मेटल शेयरों में गिरावट के पीछे ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ का क्या संबंध है?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार का एक प्रमुख मार्ग है। ईरान युद्ध के कारण यह रूट असुरक्षित हो गया है, जिससे शिपिंग कंपनियों को ‘केप ऑफ गुड होप’ के लंबे रास्ते का उपयोग करना पड़ रहा है। इससे ट्रांजिट समय और माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर मेटल कंपनियों के मुनाफे पर पड़ा है।
क्या आने वाले समय में मेटल की कीमतें बढ़ सकती हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन बाधित होने और मिडिल ईस्ट में गैस की कमी के कारण एल्युमीनियम और स्टील के उत्पादन पर असर पड़ा है। उत्पादन घटने और घरेलू मांग मजबूत होने से आने वाले समय में कीमतों में उछाल की संभावना है।
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