Breaking News:WPI:सितंबर में थोक महंगाई (WPI) घटकर 0.13% पर आई

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नई दिल्ली: सितंबर महीने में थोक महंगाई दर (Wholesale Price Index – WPI) में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जो घटकर 0.13% पर आ गई है। यह अगस्त की 0.52% थोक महंगाई दर के मुकाबले काफी कम है और मुख्य रूप से खाने-पीने की चीजों के दाम घटने का नतीजा है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए इन आँकड़ों से संकेत मिलता है कि थोक बाजार में कीमतों का दबाव कम हुआ है। हालाँकि, थोक महंगाई का सीधा असर आम आदमी पर तुरंत नहीं दिखता, लेकिन यदि यह लंबे समय तक कम बनी रहती है, तो उत्पादन लागत कम होने से अंततः खुदरा कीमतों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है

महंगाई घटने के मुख्य कारक: खाद्य पदार्थों में बड़ी नरमी

थोक महंगाई में आई इस तेज गिरावट का सबसे बड़ा कारण खाद्य पदार्थों (Food Articles) की कीमतों में आई भारी नरमी है। आँकड़ों के अनुसार, खाने-पीने की चीजों (फूड इंडेक्स) की महंगाई दर 0.21% से गिरकर माइनस 1.99% पर पहुँच गई है। यह दर्शाता है कि अनाज, सब्जियाँ और अन्य प्राइमरी आर्टिकल्स सस्ती हुई हैं, जिससे प्राइमरी आर्टिकल्स की कुल महंगाई भी माइनस 2.10% से घटकर माइनस 3.32% हो गई। दूसरी ओर, फ्यूल और पावर की थोक महंगाई दर में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई है, जो माइनस 3.17% से बढ़कर माइनस 2.58% हो गई। मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई दर भी 2.55% से घटकर 2.33% हुई है, जिसका थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में सबसे अधिक (64.23%) वेटेज होता है।

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थोक महंगाई का आम आदमी पर असर और नियंत्रण

महंगाई (WPI) मुख्य रूप से थोक बाजार की कीमतों को दर्शाती है, यानी वह कीमत जिस पर एक व्यापारी दूसरे व्यापारी से सामान खरीदता है। इसका सीधा संबंध उत्पादन लागत से होता है। यदि थोक महंगाई लंबे समय तक ऊँचे स्तर पर बनी रहती है, तो निर्माता अंततः इस बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल देते हैं, जिससे खुदरा कीमतें बढ़ जाती हैं। सरकार WPI को केवल टैक्स के माध्यम से नियंत्रित कर सकती है। उदाहरण के लिए, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि होने पर सरकार ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कम करके उपभोक्ताओं को राहत दे सकती है। WPI में मेटल, केमिकल, प्लास्टिक और रबर जैसे फैक्ट्री उत्पादों का वेटेज अधिक होता है, इसलिए इसका प्रबंधन मुख्य रूप से औद्योगिक नीति और कर संरचना पर निर्भर करता है।

थोक महंगाई (WPI) और खुदरा महंगाई (CPI) में मुख्य अंतर क्या है?

उन कीमतों को मापती है थोक महंगाई (WPI) जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है। यह मुख्य रूप से वस्तुओं की उत्पादन लागत को दर्शाती है और इसमें सेवाओं की कीमतें शामिल नहीं होती हैं। वहीं, खुदरा महंगाई उन कीमतों को मापती है जो एक आम उपभोक्ता खुदरा बाजार में वस्तुओं और सेवाओं के लिए अदा करता है। CPI को ‘आम आदमी की महंगाई’ माना जाता है।

WPI में सबसे ज्यादा वेटेज किस हिस्से का होता है, और इसका क्या महत्व है?

सबसे ज्यादा वेटेज WPI में मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स का होता है, जिसका भार 64.23% है। इसका महत्व यह है कि इस श्रेणी में कोई भी बड़ा बदलाव (जैसे कच्चे माल की कीमत या औद्योगिक उत्पादन लागत) WPI की कुल दर को सबसे अधिक प्रभावित करता है। यदि मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की थोक कीमतें बढ़ती हैं, तो WPI में भी तेज उछाल आता है।

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Dhanarekha

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