कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को आरोप लगाया कि “गरीब विरोधी” मोदी सरकार मनरेगा (MGNREGA) श्रमिकों को दबाने पर आमादा है। उन्होंने पार्टी की दो मांगों को दोहराया औऱ कहा कि मनरेगा श्रमिकों की न्यूनतम दैनिक मजदूरी ₹400 निर्धारित की जाए और साल में कम से कम 150 दिन का रोजगार दिया जाए।
समिति की सिफारिशों के बावजूद बढोत्तरी की संभावना नही
खड़गे ने एक्स (X) पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की जिसमें दावा किया गया कि सरकार, दो समितियों की सिफारिशों के बावजूद, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (NREGS) के तहत दैनिक न्यूनतम मजदूरी में सामान्य वार्षिक वृद्धि के अलावा किसी बड़ी बढ़ोतरी की संभावना नहीं है।
उन्होंने हिंदी में एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा,
“ऐसा लगता है कि जनविरोधी मोदी सरकार ने मनरेगा की मजदूरी बढ़ाने से इनकार कर दिया है। यह मनरेगा श्रमिकों के अधिकारों पर हमला करने जैसा है।”
मनरेगा श्रमिकों की दैनिक मजदूरी ₹400 करने की सिफारिश
खड़गे ने बताया कि हाल ही में संयुक्त संसदीय समिति ने मनरेगा श्रमिकों की दैनिक मजदूरी ₹400 करने की सिफारिश की थी।
“2023 में गठित अमरजीत सिन्हा की उच्चस्तरीय समिति ने भी मजदूरी बढ़ाने और मनरेगा का बजट बढ़ाने की सिफारिश की थी। लेकिन गरीब विरोधी मोदी सरकार मनरेगा श्रमिकों को दबाने पर तुली हुई है,” कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा।
उन्होंने कहा कि लगभग सात करोड़ पंजीकृत श्रमिकों को आधार-आधारित भुगतान की शर्त लागू कर मनरेगा से बाहर कर देना हो, या पिछले दस वर्षों में सबसे कम बजट आवंटित करना हो, मोदी सरकार मनरेगा पर लगातार नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।
“मनरेगा – यह रोजगार गारंटी योजना कांग्रेस पार्टी द्वारा देश के सबसे गरीब परिवारों के लिए लाई गई थी।
खड़गे ने कहा हम अपनी दो मांगों पर अडिग हैं —
- मनरेगा श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी ₹400 प्रतिदिन निर्धारित की जाए।
- उन्हें साल में कम से कम 150 दिन का रोजगार दिया जाए,”
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