Delhi: दिल्ली में भीषण गर्मी का प्रकोप

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नंद नगरी में सड़क का तापमान पहुँचा 65 डिग्री!

नई दिल्ली: दिल्ली(Delhi) में सूरज का सितम लगातार जारी है और गर्मी रिकॉर्ड तोड़ रही है। एक चौंकाने वाले खुलासे में सामने आया है कि पूर्वी दिल्ली के नंद नगरी इलाके में डामर (तारकोल) की सड़क का जमीनी तापमान (सर्फेस टेम्परेचर) रिकॉर्ड 65°C तक पहुँच गया है। पर्यावरण संस्था ‘ग्रीनपीस इंडिया’ के सहयोग(Cooperation) से थर्मल कैमरों और आधुनिक तापमान मीटरों द्वारा किए गए जमीनी स्तर के परीक्षणों में यह बात सामने आई है। दिलचस्प बात यह है कि जहाँ मोबाइल वेदर ऐप्स दिल्ली का तापमान 42°C दिखा रहे हैं, वहीं धूप में वास्तविक हवा का तापमान (एयर टेम्परेचर) 48°C दर्ज किया गया है

पेड़ की छाँव का चमत्कार और कंक्रीट के जंगल का असर

इस शोध के दौरान कंक्रीट के बढ़ते जाल के बीच प्रकृति की अहमियत भी साफ नजर आई। नंद नगरी में जहाँ एक तरफ खुली सड़क का तापमान 65°C था, वहीं ठीक बगल में एक पेड़ की छाँव के नीचे तापमान की जांच की गई, तो वह घटकर सीधे 40°C पर आ गया। यह करीब 25 डिग्री सेल्सियस का भारी अंतर दर्शाता है कि शहरों को कंक्रीट के जंगलों में तब्दील होने से बचाना और हरियाली बढ़ाना कितना जरूरी है। ग्रीनपीस इंडिया के प्रतिनिधियों के अनुसार, तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण बनने वाले ‘अर्बन हीट आइलैंड’ (Urban Heat Island) प्रभाव की वजह से ही दिल्ली में गर्मी इस कदर जानलेवा रूप ले रही है।

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बच्चों और बुजुर्गों के लिए बढ़ा गंभीर खतरा

चिकित्सा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दिल्ली में लगातार बढ़ती इस भीषण गर्मी (हीटवेव) के कारण छोटे बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं सबसे ज्यादा खतरे में हैं। डामर की सड़कों से उठने वाली तीव्र गर्म लहरों के कारण लू (हीटस्ट्रोक) लगने की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है। डॉक्टरों ने आम जनता को सलाह दी है कि दोपहर के समय जब तक बहुत जरूरी न हो, घरों से बाहर न निकलें। कंक्रीट और डामर जैसी चीजें दिनभर गर्मी को सोखती हैं और बाद में उसे हवा में छोड़ती हैं, जिससे यह संकट और गहरा जाता है।

मोबाइल वेदर ऐप्स और जमीनी स्तर पर मापे गए वास्तविक तापमान में क्या अंतर पाया गया?

मोबाइल वेदर ऐप्स दिल्ली का तापमान 42°C दिखा रहे थे, जबकि जमीनी स्तर पर थर्मल कैमरों और मीटरों से की गई जांच में खुली धूप में वास्तविक हवा का तापमान 48°C पाया गया। इसके अलावा, डामर की सड़क की सतह का तापमान (सर्फेस टेम्परेचर) तो 65°C तक रिकॉर्ड किया गया।

पेड़ की छाँव के नीचे तापमान में क्या बदलाव देखा गया और यह क्या दर्शाता है?

खुली सड़क पर जहाँ तापमान 65°C था, वहीं उसके पास मौजूद पेड़ की छाँव में तापमान अचानक गिरकर 40°C दर्ज किया गया। यह लगभग 25 डिग्री सेल्सियस का बड़ा अंतर यह दर्शाता है कि शहरों में कंक्रीट के प्रभाव को कम करने और तापमान को नियंत्रित रखने के लिए पेड़-पौधे और हरियाली कितनी महत्वपूर्ण हैं।

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Dhanarekha

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