महिला आरक्षण बिल पास न होने को लेकर सांसद नवनीत राणा भावुक हो गईं और मीडिया के सामने रो पड़ीं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों को छीन लिया है।
बयान के दौरान छलके आंसू
मीडिया से बात करते हुए नवनीत राणा ने कहा कि यह बिल महिलाओं को राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व देने का एक महत्वपूर्ण कदम था। उनका कहना था कि इस फैसले से देश की महिलाओं को निराशा हुई है।
महाराष्ट्र के अमरावती की पूर्व सांसद नवनीत राणा (Navneet Rana) शुक्रवार को रो पड़ीं। उन्होंने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास न होने पर दुख जाहिर किया। नवनीत राणा ने कहा कि विपक्ष ने महिलाओं का अधिकार छीना है।
लोकसभा में शुक्रवार को महिलाओं के आरक्षण के लिए संविधान संशोधन बिल पास नहीं हो सका। विपक्षी दलों ने इस बिल के खिलाफ वोट किया। बिल पास (Bill Passed) न होने के कारण देश की महिलाओं को बड़ा झटका लगा है। अमरावती की पूर्व सांसद नवनीत राणा महिला आरक्षण पर प्रतिक्रिया देते वक्त अपने आंसू नही रोक पाईं। उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर हमला करते हुए कहा कि विपक्ष ने अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए इस देश की महिलाओं का अधिकार छीना है।
क्या बोलीं नवनीत राणा?
अमरावती की पूर्व सांसद नवनीत राणा ने रोते हुए महिला आरक्षण पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा- “जिन लोगों ने इस बिल का विरोध किया है, उनको देश की महिलाएं महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी। महिलाओं के लिए सबसे काला दिन इन विरोधकों ने बनाया है, इस देश की कोई भी महिला माफ नहीं करेगी।”
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‘विपक्ष ने महिलाओं का अधिकार छीना’
पूर्व सांसद नवनीत राणा ने कहा- “मोदी जी, पूरे देश की महिलाएं आपको इतना धन्यवाद कर रही हैं। एक प्राइम मिनिस्टर होने के बाद, इन आम महिलाओं, इस देश की महिलाओं के लिए आप विधेयक पार्लियामेंट तक ले आये, चर्चा तक ले आये। विपक्षी दलों ने अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए इस देश की महिलाओं का अधिकार छीना है।”
पक्ष विपक्ष में कितने वोट पड़े?
गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े बिलों पर बहस का जवाब दिया था और विरोधी दलों को समझाने की कोशिश की थी। अमित शाह ने विपक्ष के सभी सवालों के जवाब दिए और आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की। 131वां संविधान संशोधन बिल को पास कराने के लिए कम से कम 352 वोटों की जरूरत थी लेकिन जब बिल को पारित कराने के लिए वोटिंग कराई गई तो बिल के सपोर्ट में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। चूंकि संविधान संशोधन बिल गिर गया। इसलिए इससे जुड़े दो विधेयक अपने आप गिर गए।
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