जम्मू,। अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इजराइल (America and Israel) के संयुक्त हमले में हुई मौत के बाद कश्मीर घाटी में तनाव चरम पर पहुंच गया है। मंगलवार को लगातार दूसरे दिन घाटी में कड़े प्रतिबंध लागू रहे। अगस्त 2019 के बाद यह पहला मौका है जब घाटी में इतने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं।
शिक्षण संस्थान बंद, इंटरनेट स्पीड कम
स्थिति को देखते हुए दो दिनों के लिए शैक्षणिक संस्थान बंद कर दिए गए और मोबाइल इंटरनेट (Mobile Internet) की स्पीड घटा दी गई। अधिकारियों ने मंगलवार को सुरक्षा बलों के काफिलों की आवाजाही भी रद्द कर दी, क्योंकि कुछ स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक होने लगे थे। तनाव को कम करने के लिए रोड ओपनिंग पार्टी तैनात नहीं करने का भी निर्णय लिया गया।
75 रैलियां, 14 लोग घायल
सोमवार को हुए विरोध प्रदर्शनों में 6 सुरक्षाकर्मियों सहित कम से कम 14 लोग घायल हो गए। अधिकारियों के अनुसार, घाटी के अलग-अलग हिस्सों में 75 रैलियां आयोजित की गईं, जबकि जम्मू क्षेत्र में भी कुछ स्थानों पर प्रदर्शन हुए।
सरकार और पुलिस की अपील
सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सभी समुदायों की भूमिका अहम है। नागरिकों से संयम बरतने और केवल सत्यापित जानकारी साझा करने की अपील की गई है। 24 घंटे की हेल्पलाइन (0194-2740003) भी शुरू की गई है, ताकि जरूरतमंदों को सहायता मिल सके। पुलिस ने चेतावनी दी है कि हिंसा भड़काने या गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अन्य पढ़े: Kabul- अफगानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर पर बढ़ा तनाव, भीषण झड़पों से दहशत में लोग
लाल चौक पर कड़ी सुरक्षा
एहतियात के तौर पर लाल चौक स्थित घंटाघर को सील कर उसके आसपास बैरिकेडिंग कर दी गई है। प्रदर्शनकारियों को एकत्र होने से रोकने के लिए शहर में भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल, विशेषकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान तैनात किए गए हैं।
Read More :