हैदराबाद। भाजपा ने तरुण कठिक (Tarun Kathik) की निर्मम हत्या के विरोध में कैंडल मार्च निकालकर अपना विरोध जताया है। इस दौरान तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने कहा कि तरुण कठिक की निर्मम हत्या के बाद विभिन्न दलित संगठनों ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया व्यक्त की और कैंडल मार्च आयोजित किए। इसी प्रकार कई हिन्दू संगठनों ने भी एकजुट होकर कैंडल मार्च का आयोजन किया। मैं भी न्याय की मांग में इनके साथ शामिल हूं। होली खेलते समय तरुण कठिक को निशाना बनाकर मारा गया। कुछ कुप्रवृत्त लोग, जो जिहादी विचारधारा से प्रेरित थे, ने केवल होली पर संगीत बजाने के कारण युवाओं के एक समूह पर हमला किया।
लगभग 30–35 लोगों ने मिलकर एक युवक पर निर्मम रूप से हमला किया और अंततः उसकी हत्या कर दी, यह घटना अब प्रकाश में आई है। तरुण कठिक पर हमला अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और भी पीड़ादायक (Painful) तथ्य यह है कि हमारे देश में कई संगठन और नेता इस घटना की स्पष्ट निंदा नहीं कर रहे हैं।
हत्या की निंदा क्यों नहीं कर रहे
मैं कांग्रेस पार्टी और अन्य उन लोगों से पूछना चाहता हूं, जो खुद को धर्मनिरपेक्ष कहते हैं, वे इस हत्या की निंदा क्यों नहीं कर रहे हैं? यदि किसी अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ व्यक्ति एक हिन्दू युवा की हत्या करते हैं, तो क्या कोई इसके बारे में बात नहीं करेगा? क्या एक हिन्दू दलित के मानवाधिकार नहीं हैं? जब हम स्वयं को सभ्य समाज कहते हैं, तो ऐसे निर्मम कृत्य पर मौन क्यों साध रहे हैं? इस देश में सभी के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। लेकिन आज इंडिया एलायंस, खासकर कांग्रेस पार्टी, केवल कुछ मामलों पर ही प्रतिक्रिया देती दिखाई दे रही है। जब एक हिन्दू दलित युवा की हत्या होती है, तो ये तथाकथित धर्मनिरपेक्ष नेता क्यों मौन हैं? उन्हें चुप्पी तोड़कर इस घटना की निंदा करनी चाहिए। किसी की सुरक्षा के लिए कोई आगे नहीं आ रहा।

जब सरकारें और कुछ राजनीतिक दल प्रतिक्रिया देने में विफल रहते हैं, तो यह अपराध करने वालों को और अधिक हौसला देता है। ऐसे हमलों के बढ़ने के समय, प्रतिक्रिया की कमी अत्यंत चिंताजनक है। इसलिए, इस घटना की सभी राजनीतिक दलों द्वारा मानवतावादी दृष्टिकोण से निंदा की जानी चाहिए। आज आर्य कठिक संघम तेलंगाना, हैदराबाद सहित कई सामाजिक संगठनों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। मैं उनकी सराहना करता हूं कि उन्होंने इस सभा में शामिल होकर शोक व्यक्त किया।
कैंडल मार्च का मतलब क्या होता है?
किसी घटना, अन्याय या दुखद हादसे के विरोध या समर्थन में लोग हाथों में मोमबत्ती लेकर शांतिपूर्ण तरीके से जो जुलूस निकालते हैं, उसे कैंडल मार्च कहा जाता है। इसका उद्देश्य बिना हिंसा के अपनी भावना और संदेश समाज तथा सरकार तक पहुँचाना होता है। आमतौर पर यह श्रद्धांजलि देने, न्याय की मांग करने या किसी सामाजिक मुद्दे के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए आयोजित किया जाता है।
कैंडल मार्च का इतिहास क्या है?
मोमबत्ती लेकर शांतिपूर्ण विरोध या श्रद्धांजलि देने की परंपरा दुनिया के कई देशों में समय के साथ विकसित हुई। यह तरीका खास तौर पर 20वीं सदी के अंत और 21वीं सदी में अधिक लोकप्रिय हुआ, जब लोग हिंसा या अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने लगे। भारत में भी कई सामाजिक और न्याय से जुड़े मामलों में कैंडल मार्च आयोजित किए जाते हैं, जहाँ लोग एकजुट होकर अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हैं।
कैंडल लाइट मार्च क्या है?
कैंडल लाइट मार्च एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन या श्रद्धांजलि कार्यक्रम होता है, जिसमें लोग हाथों में जलती हुई मोमबत्तियाँ लेकर किसी स्थान से दूसरे स्थान तक पैदल चलते हैं। इसका उपयोग आमतौर पर किसी दुखद घटना के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने, न्याय की मांग करने या सामाजिक मुद्दों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए किया जाता है। यह विरोध का एक प्रतीकात्मक और अहिंसक तरीका माना जाता है।
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