हैदराबाद। मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव (Chief Secretary K. Ramakrishna Rao) ने मंगलवार को प्रस्तावित कलेक्टर सम्मेलन की तैयारियों के मद्देनज़र सोमवार को सचिवालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। सम्मेलन को मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी तथा मंत्रिपरिषद के सदस्य संबोधित करेंगे। बैठक में सम्मेलन की सुव्यवस्थित रूपरेखा, सार्थक विचार-विमर्श तथा ठोस परिणाम सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। मुख्य सचिव ने चर्चा के प्रमुख विषयों से अधिकारियों को अवगत कराते हुए सभी संबंधित विभागों को सूक्ष्म तैयारी करने के निर्देश दिए। पूर्वाह्न सत्र में जिला कलेक्टरों को आगामी जनगणना गणना प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
12 जून तक ‘प्रजा पालन–प्रगति प्राणालिका’ कार्यक्रम
मुख्य सचिव ने जिला स्तर पर सटीक, पारदर्शी एवं समयबद्ध गणना सुनिश्चित करने हेतु ठोस आधारभूत तैयारी पर जोर दिया। अपराह्न सत्र में राज्य सरकार की 99 दिवसीय कार्ययोजना पर विशेष प्रस्तुति दी जाएगी, जिसमें प्राथमिकता वाले विकास कार्य, त्वरित भूमि अधिग्रहण तथा वन स्वीकृतियों की समयबद्ध प्रक्रिया पर बल रहेगा। विभागों को लक्ष्य, समय-सीमा और अनुश्रवण तंत्र सहित विस्तृत प्रस्तुति तैयार करने के निर्देश दिए गए। बैठक में 6 मार्च से 12 जून तक आयोजित होने वाले ‘प्रजा पालन–प्रगति प्राणालिका’ कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की गई। इस पहल का उद्देश्य प्रशासनिक पहुंच को सुदृढ़ करना, विकास कार्यक्रमों में तेजी लाना तथा जमीनी स्तर पर सेवाओं की प्रभावी आपूर्ति सुनिश्चित करना है। जिला कलेक्टरों को इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए। बैठक में पुलिस महानिदेशक शिवधर रेड्डी सहित विभिन्न विभागों के विशेष मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

एक जिले में कितने कलेक्टर होंगे?
सामान्यतः प्रत्येक जिले में केवल एक ही जिला कलेक्टर नियुक्त किया जाता है। वही जिले का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी होता है और राजस्व, कानून-व्यवस्था तथा विकास कार्यों की निगरानी करता है। उसकी सहायता के लिए अतिरिक्त कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर या उप जिलाधिकारी जैसे अधिकारी तैनात रहते हैं, लेकिन मुख्य प्रशासनिक जिम्मेदारी एक ही अधिकारी के पास होती है, जिसे जिला मजिस्ट्रेट भी कहा जाता है।
कलेक्टर से बड़ा अधिकारी कौन होता है?
जिले के स्तर पर यह पद सर्वोच्च प्रशासनिक पद माना जाता है, लेकिन राज्य स्तर पर मुख्य सचिव उससे वरिष्ठ होता है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में सभी जिलाधिकारियों का कार्य राज्य सरकार और मुख्य सचिव के अधीन होता है। मुख्य सचिव पूरे राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था का प्रमुख होता है और सभी विभागों के कार्यों का समन्वय करता है।
पुलिस को कौन सस्पेंड कर सकता है?
निलंबन का अधिकार आमतौर पर विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों के पास होता है। किसी थाने के सिपाही या सब-इंस्पेक्टर को संबंधित पुलिस अधीक्षक (SP) या उससे उच्च अधिकारी निलंबित कर सकते हैं। उच्च पदों के अधिकारियों के मामले में यह अधिकार पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस महानिदेशक या राज्य सरकार के पास होता है। कार्रवाई सेवा नियमों और जांच प्रक्रिया के अनुसार की जाती है।
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