कवाल टाइगर रिजर्व में छठे दिन भी डटे रहे विस्थापित आदिवासी
मंचेरियल। मैसामपेट और रामपुर से विस्थापित आदिवासियों ने शनिवार को लगातार छठे दिन कवाल टाइगर रिजर्व (केटीआर) के अंदर एक गांव पर फिर से कब्जा करना जारी रखा । वे वादा किए गए पुनर्वास पैकेज प्राप्त करने में अत्यधिक देरी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को दोनों गांवों के करीब 140 आदिवासी कड्डमपेद्दुर मंडल के कोट्टामड्डीपडागा गांव के पास 12 एकड़ में स्थापित पुनर्वास और पुनर्वास कॉलोनी में लौट आए। उन्होंने अस्थायी झोपड़ियाँ बना लीं और अधिकारियों द्वारा उनकी शिकायतों को दूर करने के लिए लगातार परामर्श और बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद वे साइट पर ही बने हुए हैं।
विस्थापित आदिवासियों ने जताई चिंता
आदिवासियों ने कॉलोनी में बुनियादी ढांचे की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पुनर्वास पैकेज के तहत उन्हें आवंटित कृषि भूमि अविकसित रह गई है। कॉलोनी में बच्चों के लिए स्कूल और बोरवेल और बिजली जैसी आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने दो बोरवेल, इलेक्ट्रिक मोटर और दो हाई-मास्ट लाइट लगाने की मांग की। अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने दावा किया कि पात्र लाभार्थियों को वादा किए गए समर्थन से वंचित किया जा रहा है।

आदिवासियों ने किया यह आग्रह
उन्होंने अधिकारियों से 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी व्यक्तियों की पहचान करने और उन्हें शामिल करने तथा वित्तीय मुआवज़ा लेने वालों के खातों में 15 लाख रुपये जमा करने का आग्रह किया। अधिकारियों ने बताया कि कवाल टाइगर रिजर्व के मुख्य क्षेत्र में स्थित रामपुर और मैसामपेट के 142 परिवारों को चरणबद्ध तरीके से नई कॉलोनी में स्थानांतरित किया गया है। इनमें से 48 परिवारों ने वित्तीय मुआवज़ा चुना, जबकि शेष 94 परिवारों ने पुनर्वास योजना के तहत भूमि आवंटन का विकल्प चुना।
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