हैदराबाद। हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव एम. जीवन रेड्डी (M. Jeevan Reddy) ने शुक्रवार को लोक भवन में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से मुलाकात की। इस दौरान एचसीए सचिव ने राज्य में क्रिकेट के विकास और प्रोत्साहन के लिए एसोसिएशन द्वारा उठाए जा रहे विभिन्न कदमों की जानकारी राज्यपाल को दी। उन्होंने बताया कि जमीनी स्तर पर क्रिकेट को मजबूत करने, खेल अवसंरचना के विस्तार, ग्रामीण प्रतिभाओं (Talents) को प्रोत्साहित करने और युवा क्रिकेटरों के लिए कोचिंग कार्यक्रम आयोजित करने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं।
“टीजी-20 लीग” पहल के बारे में भी बताया
जीवन रेड्डी ने राज्यपाल को प्रस्तावित “टीजी-20 लीग” पहल के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य तेलंगाना के उभरते क्रिकेट खिलाड़ियों को अधिक अवसर प्रदान करना है। उन्होंने राज्यपाल को 22 मई को राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित होने वाले आगामी इंडियन प्रीमियर लीग मुकाबले में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया। इससे पहले चारमीनार सर्किल की मुख्य वन संरक्षक एवं तेलंगाना आईएफएस ऑफिसर्स एसोसिएशन की सचिव प्रियंका वर्गीज तथा क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी जे. स्नेहजा ने भी लोक भवन में राज्यपाल से मुलाकात की। अभय फाउंडेशन के संस्थापक स्वामी बालचंद्र ने भी राज्यपाल से भेंट की।
जीवन रेड्डी कितनी बार विधायक बने?
T. Jeevan Reddy कई बार विधायक चुने जा चुके हैं। वे तेलंगाना क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और अलग-अलग चुनावों में जनता का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्होंने विधानसभा के साथ-साथ मंत्री पद की जिम्मेदारियां भी संभाली हैं और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं।
रेवंत रेड्डी का जीवन परिचय क्या है?
Anumula Revanth Reddy का जन्म तेलंगाना में हुआ था और उन्होंने छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। वे पहले क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय रहे और बाद में Indian National Congress में शामिल हुए। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद वे तेलंगाना के मुख्यमंत्री बने। वे अपने आक्रामक भाषण और सक्रिय राजनीतिक शैली के लिए जाने जाते हैं।
जीवन रेड्डी समिति कब आयी थी?
यह नाम अलग-अलग समितियों के संदर्भ में इस्तेमाल हुआ है, इसलिए सही जानकारी के लिए समिति का पूरा नाम या विषय बताना जरूरी होता है। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की राजनीति में “जीवन रेड्डी समिति” नाम कई मामलों में चर्चा में रहा है, जिनका गठन अलग-अलग समय पर किया गया था।
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