Hyderabad : बीआरएस के कार्यकाल को नहीं भूलना चाहिए- महेश कुमार गौड़

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महेश कुमार गौड़
महेश कुमार गौड़
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हैदराबाद। तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) अध्यक्ष एवं एमएलसी महेश कुमार गौड़ ने कहा कि लोकतंत्र में नए राजनीतिक दलों का स्वागत है और उन्होंने कविता द्वारा नई पार्टी के गठन पर बधाई दी। गांधी भवन में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों की बीआरएस सरकार के शासन को जनता नहीं भूल सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 से 2023 तक चले बीआरएस शासन में हुई कथित अनियमितताओं और दुरुपयोग में कविता की भी भागीदारी रही है, लेकिन इस पर वे कोई स्पष्टीकरण नहीं दे रही हैं। महेश कुमार गौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री (CM) रेवंत रेड्डी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं, ऐसे में उन पर कविता की टिप्पणियां निरर्थक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस सरकार महिला केंद्रित और जन आकांक्षाओं के अनुरूप शासन चला रही है।

गांव से लेकर शहरों तक लोग सरकार के कामकाज से संतुष्ट

उन्होंने कहा कि गांव से लेकर शहरों तक लोग सरकार के कामकाज से संतुष्ट हैं और आगामी चुनावों में कांग्रेस की सत्ता में वापसी तय है। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे कितने ही नए दल क्यों न बनें, कांग्रेस का कोई मुकाबला नहीं है। बीआरएस नेतृत्व पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि केसीआर के आसपास किस तरह के लोग थे, यह कविता को अब समझ में आना चाहिए, क्योंकि वे भी उस शासन का हिस्सा रही हैं। उन्होंने अजहरुद्दीन और कोदंड राम को शुभकामनाएं दीं। साथ ही कहा कि केटीआर के राजनीतिक अनुभव को लेकर कविता की टिप्पणी में कुछ सच्चाई हो सकती है। अंत में उन्होंने कहा कि राजनीति में आकांक्षा होना आवश्यक है, लेकिन अत्यधिक लालच से बचना चाहिए।

तेलंगाना में हिंदुओं की आबादी कितनी है?

जनगणना 2011 के अनुसार तेलंगाना में हिंदू धर्म मानने वालों की आबादी लगभग 85% के आसपास थी। राज्य के अलग-अलग जिलों में यह प्रतिशत थोड़ा अलग हो सकता है। शहरी क्षेत्रों जैसे हैदराबाद में धार्मिक विविधता अधिक दिखाई देती है, जबकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में हिंदू आबादी अधिक है। समय के साथ जनसंख्या में बदलाव संभव है, लेकिन आधिकारिक विस्तृत आंकड़े जनगणना के आधार पर ही माने जाते हैं।

तेलंगाना राज्य का मुख्य भोजन क्या है?

यहां का भोजन स्वाद, मसालों और पारंपरिक व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध है। हैदराबादी बिरयानी सबसे लोकप्रिय पहचान मानी जाती है, लेकिन रोजमर्रा के भोजन में चावल, दाल, सांभर, रसम, ज्वार की रोटी और विभिन्न मसालेदार सब्जियां प्रमुख हैं। सरवा पिंडी, पचड़ी, सकिनालु और हलीम जैसे व्यंजन भी प्रसिद्ध हैं। भोजन में दक्षिण भारतीय और दक्कनी शैली का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है।

तेलंगाना का दूसरा नाम क्या है?

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ में इस क्षेत्र को तेलंगाना के साथ-साथ “तेलंग” या “त्रिलिंग देश” से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि यह नाम तीन प्रमुख शिवलिंगों—कालेश्वरम, श्रीशैलम और द्राक्षारामम—से संबंधित है। इसलिए इसे त्रिलिंग देश कहा गया, जो समय के साथ तेलंगाना नाम में प्रचलित हुआ। यह नाम इसकी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को दर्शाता है।

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Ajay Kumar Shukla

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Ajay Kumar Shukla

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