कुल चोरी की 10 बाइक बरामद
हैदराबाद। शहर की स्पेशल क्राइम टीम (CCS) और गांधी नगर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दोपहिया वाहन चोरी में शामिल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से कुल 10 चोरी की बाइक बरामद की हैं। गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद रियाज, सैयद अहमद अली, मोहम्मद फरदीन और एक नाबालिग (CCL) शामिल हैं। सभी आरोपी हैदराबाद के विभिन्न इलाकों के निवासी हैं और अलग-अलग काम करते थे।
8 होंडा डियो, 1 हीरो ग्लैमर और 1 बजाज पल्सर एनएस-200 बाइक बरामद
पुलिस के अनुसार आरोपियों के पास से 8 होंडा डियो, 1 हीरो ग्लैमर और 1 बजाज पल्सर एनएस-200 बाइक बरामद की गई हैं। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने बालानगर, गांधी नगर, कोल्लूर और अत्तापुर थाना क्षेत्रों में 10 दोपहिया वाहन चोरी की वारदातों को अंजाम देने की बात कबूल की है। पुलिस ने एक सूचना के आधार पर आरोपियों पर नजर रखी और उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर गतिविधियों की भी निगरानी की।
इसके बाद 23 अप्रैल 2026 की सुबह एमएम पहाड़ी, अत्तापुर इलाके में दबिश देकर सभी आरोपियों को पकड़ लिया गया। यह कार्रवाई च. सुधाकर राव के नेतृत्व में उनकी टीम ने की। इस ऑपरेशन को एस. चैतन्य कुमार के मार्गदर्शन और जी. वेंकटेश्वर रेड्डी की निगरानी में अंजाम दिया गया। पुलिस ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच जारी है।
चोरी हुए वाहन को कैसे ढूंढें?
सबसे पहले नजदीकी पुलिस स्टेशन में तुरंत एफआईआर दर्ज करानी चाहिए और वाहन का नंबर, मॉडल, रंग, इंजन नंबर तथा चेसिस नंबर जैसी पूरी जानकारी देनी चाहिए। इसके बाद वाहन बीमा कंपनी को भी सूचित करना जरूरी होता है। कई राज्यों में ऑनलाइन पोर्टल और ट्रैफिक कैमरों की मदद से भी खोज की जाती है। पुलिस जांच, सीसीटीवी और वाहन ट्रैकिंग के माध्यम से गाड़ी मिलने की संभावना बढ़ती है।
गाड़ी चोरी करने पर कौन सी धारा लगती है?
वाहन चोरी करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत चोरी से संबंधित प्रावधान लागू होते हैं। पहले यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 379 के अंतर्गत देखा जाता था। चोरी की गंभीरता, वाहन की कीमत और अन्य परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त धाराएं भी लग सकती हैं। पुलिस जांच के बाद अदालत में मामला चलता है और दोष सिद्ध होने पर सजा दी जाती है।
मेरी गाड़ी चोरी हो जाए तो क्या करें?
तुरंत पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराएं और एफआईआर की कॉपी प्राप्त करें। वाहन के सभी दस्तावेज जैसे आरसी, बीमा, ड्राइविंग लाइसेंस और खरीद संबंधी जानकारी साथ रखें। बीमा कंपनी को तुरंत सूचना दें ताकि क्लेम प्रक्रिया शुरू हो सके। आसपास के सीसीटीवी, पार्किंग रिकॉर्ड और गवाहों की जानकारी भी पुलिस को दें। समय पर कार्रवाई करने से वाहन मिलने की संभावना अधिक रहती है।
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