हैदराबाद। साइबराबाद पुलिस के तत्वावधान में सोसायटी फॉर साइबराबाद सिक्योरिटी काउंसिल (SCSC) द्वारा ‘मार्गदर्शक – योर बडी इन डिस्ट्रेस (3.0, प्रथम बैच)’ प्रमाणन कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह पहल सामुदायिक सहयोग और संकट में सहायता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता साइबराबाद के पुलिस आयुक्त डॉ. एम. रमेश ने की। इस अवसर पर महिला एवं बाल सुरक्षा प्रकोष्ठ की डीसीपी के. सृजना सहित अन्य गणमान्य अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान साइबराबाद (Cyberabad) महिला एवं बाल सुरक्षा विंग और एससीएससीके संयुक्त तत्वावधान में स्टॉकिंग जागरूकता पर एक वीडियो भी जारी किया गया।
‘मार्गदर्शक – योर बडी इन डिस्ट्रेस (3.0)’ प्रमाणन कार्यक्रम साइबराबाद में शुरू
‘मार्गदर्शक 3.0’ पूर्व के ‘मार्गदर्शक’ और ‘संगमित्र’ कार्यक्रमों का उन्नत स्वरूप है, जिसका उद्देश्य प्रशिक्षित ‘इमोशनल फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स’ का एक नेटवर्क तैयार करना है, जो संकट में फंसे लोगों को समय पर सहयोग, मार्गदर्शन और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच प्रदान कर सके। तीन सप्ताह के इस संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए विभिन्न संस्थाओं और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों से लगभग 80 नामांकन प्राप्त हुए, जिनमें से पूर्व मूल्यांकन के बाद 60 प्रतिभागियों का चयन किया गया। प्रशिक्षण के अंतर्गत महिला पुलिस थाने, गाचीबौली पुलिस स्टेशन, भरोसा केंद्र, एएचटीयू, सीडीईडब्ल्यू तथा शी टीम जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों का फील्ड विजिट भी कराया गया।

60 से अधिक प्रतिभागियों को ‘मार्गदर्शक’ के रूप में किया गया प्रमाणित
कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले 60 से अधिक प्रतिभागियों को ‘मार्गदर्शक’ के रूप में प्रमाणित किया गया। एससीएससी की निदेशक (स्ट्रैटेजिक प्रोग्राम एक्जीक्यूशन) रश्मि श्रीवास्तव ने इन स्वयंसेवकों को एकजुट कर सामुदायिक सहायता नेटवर्क की शुरुआत की। इस अवसर पर एससीएससी के प्रमुख पदाधिकारी रमेश काजा (महासचिव), नवेद आलम खान (सीईओ), रघु कन्नन (संयुक्त सचिव), वेंकट शेषु (महिला फोरम सह-प्रमुख) सहित महिला सुरक्षा फोरम की सदस्य सोनिया सहगल (माइक्रोसॉफ्ट) और शालिनी सिंगिरेड्डी (टीसीएस) भी उपस्थित रहीं। प्रशिक्षण में वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक ज़ारा अहमद सिद्दीकी और अनुभवी स्वयंसेवक पद्मप्रिया चिलकमर्ति ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पुलिसिंग केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं
पुलिस आयुक्त डॉ. एम. रमेश ने अपने संबोधन में कहा कि आज पुलिसिंग केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें देखभाल और सामुदायिक सहभागिता भी शामिल है। ‘मार्गदर्शक’ जैसे कार्यक्रम प्रशिक्षित स्वयंसेवकों को भावनात्मक सहयोग की पहली पंक्ति के रूप में तैयार कर, संकट की स्थिति को बढ़ने से पहले ही संभालने में मदद करते हैं। साइबराबाद पुलिस और एससीएससी ने ‘मार्गदर्शक 3.0’ जैसे प्रयासों के माध्यम से सुरक्षित और संवेदनशील समाज के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
साइबराबाद पुलिस क्या है?
यह तेलंगाना में हैदराबाद महानगर के आईटी और शहरी क्षेत्रों की कानून-व्यवस्था संभालने वाला पुलिस कमिश्नरेट है। इसमें HITEC City, गाचीबौली, माधापुर और आसपास के प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इसका काम अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। आईटी कंपनियों की अधिक संख्या होने के कारण यहां साइबर अपराधों की रोकथाम पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
भारत का पहला साइबर अपराध पुलिस स्टेशन कौन सा है?
भारत का पहला साइबर अपराध पुलिस स्टेशन बेंगलुरु, कर्नाटक में स्थापित किया गया था। इसे बढ़ते ऑनलाइन अपराध, हैकिंग, बैंक फ्रॉड और डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने के लिए शुरू किया गया। इसके बाद देश के कई राज्यों में विशेष साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन बनाए गए। आज लगभग हर बड़े शहर में साइबर अपराधों की जांच के लिए अलग इकाइयां कार्य कर रही हैं।
साइबर क्राइम हैदराबाद के लिए व्हाट्सएप नंबर क्या है?
साइबर धोखाधड़ी, ऑनलाइन फ्रॉड या बैंकिंग ठगी की शिकायत के लिए सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत संपर्क करना चाहिए। साथ ही National Cyber Crime Reporting Portal पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस भी लोगों को 1930 और cybercrime.gov.in के माध्यम से रिपोर्ट करने की सलाह देती है। अलग-अलग पुलिस यूनिट के व्हाट्सएप नंबर बदल सकते हैं, इसलिए 1930 सबसे सुरक्षित और आधिकारिक विकल्प माना जाता है।
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