Anil Ambani: अनिल अंबानी की बढ़ी मुश्किलें

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₹2,929 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में CBI की दूसरे दिन भी पूछताछ

नई दिल्ली: रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) से जुड़े ₹2,929 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में अनिल अंबानी(Anil Ambani) को लगातार दूसरे दिन दिल्ली स्थित CBI मुख्यालय बुलाया गया। शुक्रवार को हुई इस पूछताछ से पहले, गुरुवार को भी जांच अधिकारियों ने उनसे करीब 8 घंटे तक सवाल-जवाब किए थे। यह पूरी कार्रवाई भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा दर्ज कराई गई FIR के आधार पर की जा रही है। CBI यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस ऋण धोखाधड़ी में कुछ अज्ञात लोक सेवकों या बैंक अधिकारियों की भी मिलीभगत थी

फॉरेंसिक ऑडिट का खुलासा: फंड डाइवर्ट करने का आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले की जड़ एक फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट है, जिसमें साल 2013 से 2017 के बीच लोन राशि के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का दावा किया गया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया(Anil Ambani) है कि बैंकों से लिए गए पैसे को व्यापारिक उद्देश्यों के बजाय रिलायंस ग्रुप की ही दूसरी संस्थाओं में ‘घुमाया’ या डाइवर्ट किया गया। इस हेरफेर के कारण अकेले SBI को ₹2,929 करोड़ का नुकसान हुआ, जबकि 17 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल फंसा हुआ पैसा (Exposure) ₹19,694 करोड़ से अधिक है।

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छापेमारी और अन्य बैंकों की शिकायतें: गहराता संकट

अनिल अंबानी की मुसीबतें सिर्फ SBI तक सीमित नहीं हैं। PNB, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक जैसे कई अन्य बैंकों ने भी RCOM के खिलाफ अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई हैं। अगस्त 2025 में CBI ने मुंबई स्थित रिलायंस के दफ्तरों और अनिल अंबानी के घर पर छापेमारी की थी, जहाँ से कई ‘आपत्तिजनक’ दस्तावेज जब्त किए गए थे। फिलहाल जांच का दायरा उन दस्तावेजों और फंड ट्रेल की कड़ियों को जोड़ने पर केंद्रित है, जिससे यह साफ हो सके कि जनता का पैसा कहाँ और कैसे इस्तेमाल किया गया।

फॉरेंसिक ऑडिट क्या होता है और इस केस में इसकी क्या भूमिका है?

फॉरेंसिक ऑडिट एक विशेष प्रकार की लेखा परीक्षा है जिसका उपयोग कानूनी कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में किया जाता है। इस मामले में, ऑडिट ने यह उजागर किया कि RCOM को दिया गया लोन जिस काम के लिए लिया गया था, वहां खर्च न होकर दूसरी कंपनियों में भेज दिया गया, जो बैंकिंग नियमों का उल्लंघन और धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।

‘बैंकों का कंसोर्टियम’ क्या है जो इस मामले में शामिल है?

जब कोई कंपनी बहुत बड़ा लोन लेती है, तो जोखिम कम करने के लिए कई बैंक मिलकर कर्ज देते हैं, जिसे ‘बैंकों का कंसोर्टियम’ कहा जाता है। RCOM के मामले में SBI इस समूह का नेतृत्व कर रहा है, जिसमें PNB, केनरा बैंक और IDBI जैसे 17 बैंक शामिल हैं।

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