Gaddar : गद्दर की आवाज़ एक आंदोलन थी, सिर्फ संगीत नहीं -महेश गौड़

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गद्दर
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हैदराबाद। क्रांतिकारी कवि और जनगायक गद्दर की जयंती के अवसर पर टीपीसीसी अध्यक्ष (TPCC President) एवं एमएलसी महेश कुमार गौड़ ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि (Heartfelt Tribute) अर्पित की। उन्होंने सामाजिक न्याय और समानता के लिए गद्दर के आजीवन संघर्ष को याद किया।

शोषितों की आवाज़ को मुखर किया

महेश गौड़ ने कहा कि गद्दार के सशक्त गीतों ने शोषितों की आवाज़ को मुखर किया और तेलंगाना आंदोलन के दौरान जनता में साहस और चेतना का संचार किया। उन्होंने गद्दर को लोकतांत्रिक प्रतिरोध का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनके प्रत्येक गीत में जागरण का संदेश था

उनका संघर्ष देश के इतिहास में अमिट रहेगा

उन्होंने कहा, अपनी बुलंद आवाज़ और गीतों के माध्यम से गद्दर ने वंचित वर्गों की पीड़ा को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए उनका संघर्ष देश के इतिहास में अमिट रहेगा। महेश गौड़ ने जोर देकर कहा कि गद्दार के आदर्श सार्वजनिक नीतियों और शासन में भी प्रतिबिंबित होने चाहिए।

गायक बनने से पहले गद्दर क्या कर रहे थे?

गद्दर (गुम्मड़ी विट्ठल राव)

  • शुरुआत में एक स्कूल शिक्षक के रूप में काम कर रहे थे
  • बाद में वे वामपंथी / नक्सलवादी जनआंदोलन से जुड़े
  • इसी दौरान उन्होंने जनसंघर्षों के लिए गीत लिखना-गाना शुरू किया और जन नाट्य मंडली (Jana Natya Mandali) के माध्यम से प्रसिद्ध जनगायक बने.

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Ajay Kumar Shukla

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Ajay Kumar Shukla

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