हैदराबाद । तेलंगाना के मुलुगू जिले में आयोजित होने वाले एशिया के सबसे बड़े (Asia’s largest)आदिवासी महोत्सव मेडारम जातरा की तैयारी लिए युद्ध स्तर पर शुरू हो गई है। जातरा की तैयारियों के मद्देनज़र तेलंगाना के राजस्व, भवन एवं सूचना जनसंपर्क मंत्री (Minister) पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने राज्य पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल कल्याण मंत्री दनसरी अनसूया (सीतक्का), देवदाय विभाग मंत्री कोंडा सुरेखा, सांसद बलराम नायक तथा अन्य अधिकारियों के साथ विभिन्न निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया।
मेडारम जातरा में स्थायी विकास कार्य शुरू किए गए हैं : पोंगुलेटी
इस दौरान तेलंगाना के राजस्व, भवन एवं सूचना जनसंपर्क मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने कहा कि एशिया महाद्वीप के सबसे बड़े आदिवासी गिरीजन महोत्सव मेडारम जातरा के लिए व्यापक और भव्य तैयारियाँ चल रही हैं। उन्होंने बताया कि आने वाली पीढ़ियों को ध्यान में रखते हुए मेडारम में स्थायी विकास कार्य शुरू किए गए हैं, और इन्हें निर्धारित समय में पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के निर्देशों के अनुरूप आदिवासी परंपराओं को प्राथमिकता देते हुए, इलवेल्पुलु सम्मक्का–सारलम्मा, पगिडिद्दराजु, गोविंदराजु के गड्डों के आसपास के प्रांगण में लाखों भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखकर बड़े पैमाने पर विकास कार्य शुरू किए गए हैं। सड़क निर्माण, डिवाइडर, पौधारोपण आदि कार्यों को 24 घंटे लगातार चलाकर जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया। मुख्य मार्गों की मरम्मत तेजी से पूरी करने के आदेश भी दिए गए, जिससे यात्रा में भक्तों को कोई असुविधा न हो।

जातरा के लिए सभी व्यवस्थाएँ सुनियोजित ढंग से की जा रही हैं : मंत्री
उन्होंने कहा कि करोड़ों भक्तों की आस्था से जुड़ी इस जातरा के लिए सभी व्यवस्थाएँ सुनियोजित ढंग से की जा रही हैं। अग्रिम , मोक्कू, चढ़ाने आने वाले भक्तों को भी किसी प्रकार की दिक्कत न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। जातरा की गरिमा के अनुरूप विशाल स्वागत तोरण, गड्डों तक भक्तों की आसान पहुँच, दर्शन एवं सोने (बेल्लम) की समर्पणा, जंपन्ना वागु में स्नान की व्यवस्थाएँ इन सभी पर विशेष कार्य किए जा रहे हैं। मंत्रीगणों ने मंदिर परिसर, जंपन्ना वागु, स्तूप से बसस्टैंड तक सड़क चौड़ीकरण कार्यों का भी निरीक्षण किया। जंपन्ना वागु के विकास एवं सौंदर्यीकरण के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं।
सभी विकास कार्य आदिवासी परंपराओं, मान्यताओं के अनुरूप
उन्होंने कहा कि मेडारम में होने वाले सभी विकास कार्य आदिवासी परंपराओं, मान्यताओं और विश्वासों को बिना किसी बाधा के, पूरी तरह आदिवासी रीति–रिवाजों के अनुरूप तथा जत्रा पुजारियों और आदिवासी बड़ों की सलाह से किए जा रहे हैं। साल में दो बार होने वाली महा जत्रा के साथ ही वर्षभर गड्डों के दर्शन के लिए आने वाले भक्तों की संख्या बढ़ रही है, इस बढ़ते आवागमन को देखते हुए ही व्यवस्थाएँ की जा रही हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सचिव के. एस. श्रीनिवास राजू, आरएंडबी ईएनसी मोहन नायक, जिला ग्रंथालय समिति अध्यक्ष बानोथ रवि चंदर, कृषि मार्केट समिति अध्यक्ष रेगा कल्याणी, राज्य नेता एर्राबेल्ली मनोज कुमार, मंडल के पूर्व अध्यक्ष जालपु अनंत रेड्डी, अन्य जिला एवं मंडल नेता तथा अधिकारी उपस्थित थे।
मेडारम जतारा क्या है ?
- स्थान: मेदारम, मुलुगु जिला, तेलंगाना
- आयोजन: हर दो साल में एक बार, माघ महीने की पूर्णिमा पर
- अवधि: चार दिनों तक
- महत्व: एशिया का सबसे बड़ा आदिवासी त्योहार और दक्षिण भारत का कुंभ माना जाता है। इसे ‘राष्ट्रीय त्योहार’ भी घोषित किया गया है।
- पूजा: भक्त समक्का और सरलम्मा देवियों को अपने वजन के बराबर गुड़ चढ़ाते हैं।
- धार्मिक महत्व: भक्त जम्पन्ना वागु नदी में स्नान करते हैं।
- आयोजनकर्ता: यह मुख्य रूप से कोया समुदाय द्वारा आयोजित किया जाता है, लेकिन अब इसमें गैर-कोया समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।
- सांस्कृतिक महत्व: यूनेस्को ने इसे मानवता की ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ घोषित किया है।
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