मुख्य बातें: –
- नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में उम्रकैद बरकरार
- कोर्ट ने आसाराम को तत्काल सरेंडर करने का आदेश दिया
- गैंगरेप की धारा से मिली राहत, बाकी दोषसिद्धि कायम
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में (Asaram Bapu) को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उनकी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए तत्काल सरेंडर करने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने नहीं दी बड़ी राहत
जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार (Justice Yogendra Kumar) पुरोहित की डिवीजन बेंच ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि निचली अदालत द्वारा दी गई सजा में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि अदालत ने आसाराम समेत अन्य आरोपियों को गैंगरेप की धारा से बरी कर दिया, लेकिन अन्य गंभीर आरोपों में दोषसिद्धि कायम रखी गई।
फिलहाल अंतरिम जमानत पर बाहर हैं आसाराम
आसाराम इस समय मेडिकल ग्राउंड पर मिली अंतरिम जमानत के आधार पर जेल से बाहर हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उन्हें स्वास्थ्य कारणों से राहत दी गई थी, जिसकी अवधि कई बार बढ़ाई जा चुकी थी। लेकिन हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब उन्हें दोबारा सरेंडर करना होगा। फैसले के दौरान कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई।
2013 में दर्ज हुआ था मामला
यह मामला अगस्त 2013 का है, जब जोधपुर स्थित आश्रम में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा ने आसाराम पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। मामले की सुनवाई के बाद विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 25 अप्रैल 2018 को आसाराम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
बचाव पक्ष और अभियोजन के तर्क
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने मामले को मनगढ़ंत बताते हुए पीड़िता और उसके परिवार के बयानों में विरोधाभास होने की बात कही। वहीं अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि पॉक्सो मामलों में पीड़िता का बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है। सरकारी वकीलों ने गवाहों पर हमले और हत्याओं का जिक्र करते हुए साक्ष्य मिटाने की साजिश का आरोप भी लगाया।
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गुजरात मामले में भी उम्रकैद की सजा
आसाराम को जनवरी 2023 में गुजरात के गांधीनगर आश्रम में महिला अनुयायी से दुष्कर्म मामले में भी उम्रकैद की सजा मिल चुकी है। 86 वर्षीय आसाराम लगातार बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देकर राहत की मांग करते रहे हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने अब साफ कर दिया है कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का पालन करते हुए सरेंडर करना होगा।
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