हैदराबाद। तेलंगाना कृषि एवं किसान कल्याण आयोग ने लघु सिंचाई संसाधनों के पुनर्गठन (माइनर इरिगेशन सिस्टम्स रिऑर्गनाइजेशन), तालाब संरक्षण समितियों के गठन तथा तालाबों के डी-सिल्टिंग (गाद हटाने) से संबंधित एक समग्र नोट तैयार कर राज्य के सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी (Uttam Kumar Reddy) को सौंपा है। आयोग के अध्यक्ष एम. कोदंड रेड्डी के नेतृत्व में सिंचाई एवं कृषि विभाग के अधिकारियों, वालमतारी के प्रतिनिधियों तथा विशेषज्ञों के साथ कई बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में तालाबों के संरक्षण के लिए स्थायी व्यवस्था की आवश्यकता और जल भंडारण क्षमता (Water Storage Capacity) बढ़ाने के लिए डी-सिल्टिंग के महत्व पर विस्तृत चर्चा की गई।
आवश्यक कदम उठाने का किया अनुरोध
बैठकों में हुई चर्चाओं के आधार पर आयोग ने तालाब संरक्षण समितियों के गठन और डी-सिल्टिंग कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर मंत्री को सौंपी तथा आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया। इस अवसर पर आयोग के सदस्य केवी नरसिम्हा रेड्डी, भवानी मरिकांति, गडुगु गंगाधर, सुनील, रामरेड्डी गोपाल रेड्डी, सदस्य सचिव गोपाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। आयोग ने कहा कि तालाबों के संरक्षण और जल के समुचित उपयोग के माध्यम से किसानों को दीर्घकालिक लाभ पहुंचाना ही सरकार का मुख्य उद्देश्य है।
तालाब के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का क्या आदेश है?
सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में कहा है कि तालाब, झील और जलाशय सार्वजनिक संपत्ति हैं और इन पर अवैध कब्जा नहीं होना चाहिए। अदालत ने राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया है कि ऐसे जल स्रोतों की पहचान कर उन्हें अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए। जल निकायों को भरकर निर्माण कार्य करना पर्यावरण और समाज दोनों के लिए हानिकारक माना गया है, इसलिए इनके संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया है।
जल संरक्षण के 10 उपाय क्या हैं?
पानी बचाने के लिए वर्षा जल संचयन, टपक सिंचाई, रिसाव रोकना, तालाबों की सफाई, पेड़ लगाना, भूजल रिचार्ज, नदियों और झीलों को प्रदूषण से बचाना, घरेलू पानी का पुनः उपयोग, कम पानी वाली खेती अपनाना और लोगों में जागरूकता फैलाना महत्वपूर्ण उपाय हैं। इन तरीकों से जल की बर्बादी कम होती है और भविष्य के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध रखने में मदद मिलती है।
हमें अपने तालाबों का संरक्षण कैसे करना चाहिए?
तालाबों की नियमित सफाई, गाद हटाना और आसपास कचरा फेंकने से रोकना सबसे जरूरी है। अवैध कब्जा और निर्माण कार्यों को रोकना चाहिए ताकि जल स्रोत सुरक्षित रहें। वर्षा जल को तालाबों तक पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए और आसपास पेड़-पौधे लगाने चाहिए। ग्राम पंचायत और स्थानीय लोगों की भागीदारी से तालाबों की देखभाल बेहतर होती है, जिससे जल स्तर और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रहते हैं।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :