PAK- पाकिस्तान के सोने पर चीन-अमेरिका की नजर

Read Time:  1 min
Trump iran final warning
Trump iran final warning
FONT SIZE
GET APP

इस्लामाबाद,। पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत (Bloochistan Prant) जो अब तक अस्थिरता और संघर्ष के लिए जाना जाता रहा है, अब वैश्विक महाशक्तियों के बीच आर्थिक वर्चस्व की लड़ाई का केंद्र बन गया है। बंजर जमीन के नीचे छिपे सोने, चांदी और तांबे के विशाल भंडार ने अमेरिका और चीन दोनों का ध्यान खींच लिया है।

रेको डीक खदान में अमेरिका का ऐतिहासिक निवेश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ (Project Volt) के तहत बलूचिस्तान की रेको डीक खदान में 1.3 अरब डॉलर (करीब 1.17 लाख करोड़ रुपये) के निवेश का ऐलान किया है। इसे पाकिस्तान के खनन क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश माना जा रहा है।

चीन के दबदबे को तोड़ने की रणनीति

अमेरिका का यह कदम सिर्फ व्यापारिक निवेश नहीं, बल्कि चीन के खिलाफ एक सोची-समझी रणनीतिक चाल के तौर पर देखा जा रहा है। वर्तमान में रेयर अर्थ मिनरल्स के वैश्विक बाजार पर चीन का प्रभुत्व है, जो रक्षा, इलेक्ट्रिक वाहन और हाई-टेक उद्योगों के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।

‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ और विदेशी निवेश की खासियत

2 फरवरी 2026 को लॉन्च किया गया ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ मुख्य रूप से अमेरिका के भीतर खनन परियोजनाओं पर केंद्रित है, लेकिन रेको डीक इस योजना के तहत अमेरिका का सबसे बड़ा और इकलौता विदेशी निवेश स्थल बनकर उभरा है।

क्यों खास है रेको डीक खदान

रेको डीक खदान को दुनिया के सबसे बड़े तांबे और सोने के भंडारों में से एक माना जाता है। बलूचिस्तान के चागई पहाड़ों में स्थित यह क्षेत्र एक प्राचीन ज्वालामुखीय श्रृंखला का हिस्सा है। अनुमान है कि यहां करीब 5.9 बिलियन टन अयस्क मौजूद है, जिसमें 41.5 मिलियन औंस सोना और भारी मात्रा में तांबा शामिल है। इसी वजह से इसे ‘सोने का पहाड़’ भी कहा जाता है।

सुरक्षा और कानूनी विवाद बड़ी चुनौती

हालांकि इस निवेश की राह आसान नहीं है। बलूचिस्तान लंबे समय से अलगाववादी आंदोलनों और गंभीर सुरक्षा चुनौतियों से जूझता रहा है। वर्ष 2011 में इस खदान से जुड़ा विवाद अंतरराष्ट्रीय अदालतों तक पहुंच चुका है।

बैरिक गोल्ड और बढ़ती सुरक्षा चिंताएं

फिलहाल इस खदान पर कनाडा की कंपनी बैरिक गोल्ड काम कर रही है, लेकिन हालिया सुरक्षा घटनाओं ने विदेशी कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। इसके बावजूद अमेरिका का आगे बढ़ना इस बात का संकेत है कि इन खनिजों की उसे कितनी सख्त जरूरत है।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है सहारा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था के लिए राहत का जरिया बन सकता है, लेकिन इसके राजनीतिक और कूटनीतिक मायने कहीं ज्यादा गहरे हैं।

अन्य पढ़े: DGP : ऑल इंडिया पुलिस फुटबॉल चैंपियनशिप की तैयारी, डीजीपी ने की समीक्षा

चीन-अमेरिका टकराव की नई जमीन

बलूचिस्तान में चीन पहले से ही सक्रिय है। ऐसे में अमेरिका की एंट्री से क्षेत्र में नया कूटनीतिक तनाव पैदा होने की आशंका है। इसे पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व और व्हाइट हाउस के बीच बढ़ती नजदीकियों के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।अब नजर इस बात पर है कि अमेरिका इस अशांत इलाके में अपने रणनीतिक हितों की सुरक्षा कैसे करता है और चीन इस नई चुनौती का किस तरह जवाब देता है।

Read More :

Anuj Kumar

लेखक परिचय

Anuj Kumar

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।